Chanakya Neeti – Hindi translation based on the english version by Swami Sri Miles Davis (Patita Pavana dasa) of ISKCON Lucknow, India

सर्वशक्तिमान भगवान विष्णु को नमन करते हुए जो तीनो लोको के स्वामी है, मै एक राज्य के लिए नीति शास्त्र के सिद्धांतो को कहता हूँ. अनेक शास्त्रों का आधार ले कर मै यह सूत्र कह रहा हूँ.
जो व्यक्ति शास्त्रों के सूत्रों का अभ्यास करके ज्ञान ग्रहण करेगा उसे अत्यंत वैभवशाली कर्त्तव्य के सिद्धांत ज्ञात होंगे. उसे पता चलेगा की किस बात को करना चाहिए और किसे नहीं करना चाहिए. उसे पता चलेगा की भला क्या है और बूरा क्या है. उसे सर्वोत्तम का भी ज्ञान होगा.
इसीलिए लोगो का भला करने के लिए मै उस बात को कहता हूँ की जिससे लोग सभी बातो को सही परिप्रेक्ष्य में देखेंगे.
एक विद्वान् भी दुखी हो जाता है यदि वह किसी मुर्ख को उपदेश देता है, यदि वह एक दुष्ट पत्नी का पालन करता है या किसी दुखी व्यक्ति के साथ अत्यंत घनिष्ट सम्बन्ध बना लेता है.
दुष्ट पत्नी, झूठा मित्र, बदमाश नौकर और सर्प के साथ निवास साक्षात् मृत्यु के समान है.
व्यक्ति ने आने वाली मुसीबतों से निपटकर धन संचय करना चाहिए. उसने धन को त्यागकर पत्नी की सुरक्षा करनी छाहिये. लेकिन यदि आत्मा की सुरक्षा की बात आती है तो उसके सामने उसे धन और पत्नी दोनों को गौण समझना चाहिए.
आगे आने वाली मुसीबतों के लिए धन संचय करे. ऐसा ना कहे की धनवान व्यक्ति को मुसीबत कैसी? जब धन साथ छोड़ता है तो संग्रहित धन तेजी से घटता है.
उस देश में निवास न करे जहा आपकी कोई इज्जत नहीं, जहा आप रोजगार नहीं कमा सकते, जहा आपके कोई मित्र नहीं और जहा आप कोई ज्ञान अर्जित नहीं करते.
वहा एक दिन भी ना रुके जहा ये पाच ना हो. धनवान व्यक्ति, विद्वान् व्यक्ति जो शास्त्रों को जानता हो, राजा, नदिया और चिकित्सक.
बुद्धिमान व्यक्ति ऐसे देश कभी ना जाए जहा …
रोजगार कमाने का कोई माध्यम ना हो.
जहा लोग किसीसे डरते न हो.
जहा लोगो को किसी बात की लज्जा न हो.
जहा लोगो के पास बुद्धिमत्ता न हो.
जहा के लोगो की वृत्ति दान धर्मं करने की ना हो.
नौकर की परीक्षा जब वह कर्त्तव्य पालन कर रहा हो तब करे.
रिश्तेदार की परीक्षा जब आप मुसीबत में हो तब करे.
मित्र की परीक्षा विपरीत काल में करे.
जब आपका वक़्त अच्छा न चल रहा हो तब पत्नी की परीक्षा करे.
अच्छा मित्र हमें तब नहीं छोड़ेगा जब हमें उसकी जरुरत हो, कोई दुर्घटना हो गयी हो, अकाल पड़ा हो, युद्ध चल रहा हो, जब हमें राजा के दरबार में जाना पड़े, जब हमें स्मशान घाट जाना पड़े.
जो व्यक्ति किसी नाशवंत चीज के लिए जिसका कभी नाश नहीं होने वाला ऐसी चीज को छोड़ देता है, तो उसके हाथ से अविनाशी तो चला ही जाता है और इसमें कोई संदेह नहीं की नाशवान को भी वह खो देता है.
एक बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए की वह एक इज्जतदार घर की अविवाहीत कन्या से विवाह करे. यदि ऐसी कन्या में कोई व्यंग है तो भी. किसी हीन घर की लड़की से वह सुन्दर हो तो भी विवाह नहीं करना चाहिए. शादी बराबरी के घरो में हो यह उचित है.
आप कभी इनपर विश्वास ना करे.
१. नदिया
२. जिसके हाथ में शस्त्र हो.
३. पशु जिसे नाख़ून या सिंग हो.
४. औरत (यहाँ संकेत भोली सूरत की तरफ है, बहने बुरा न माने )
५. राज घरानों के लोगो पर.
विष में से भी हो सके तो अमृत निकाल ले.
यदि सोना गन्दगी में गिरा हो तो उसे उठाये और धोये और अपनाये.
यदि कोई निचले कुल में जन्मने वाला भी आपको सर्वोत्तम ज्ञान देता है तो उसे अपनाये.
उसी तरह यदि कोई बदनाम घर की लड़की जो महान गुणों से संपन्न है यदि आपको सीख देती है तो ग्रहण करे.

औरतो में मर्दों के मुकाबले ….
भूख दो गुना
लज्जा चार गुना
सहस छः गुण
कामना आठ गुना
… होती है.

Chapter II

झूठ बोलना, कठोरता, छल करना, बेवकूफी करना, लालच, अस्वछता और क्रौर्य ये औरतो के नैसर्गिक दुर्गुण हैं.

जो व्यक्ति मामूली तप नहीं करता है उसे तप के ये फल प्राप्त होते है..
१. वह भोजन खाने की क्षमता रखता है जो उसे परोसा गया है.
२. वह अपनी धर्मं पत्नी के साथ जबरदस्त और मर्दानगी भरी प्रणय क्रीडा करता है.
३. जब उसके पास सम्पन्नता होती है तो वह दान करने का दिल रखता है.
उस व्यक्ति ने धरती पर ही स्वर्ग को पा लिया..
१. जिसका पुत्र आज्ञाकारी है.
२. जिसकी पत्नी उसकी इच्छा के अनुरूप बरतती है.
३. जिसे अपने धन पर संतुष्टि है.
वही पुत्र है, जो पिता का कहा मानते है. वही पिता है जो पुत्रो को सहारा दे. वह मित्र है जिस पर आप विश्वास कर सकते है. वही पत्नी है जो पति के सहवास में संतोष और शांति अनुभव करती है.
उनसे बचे जो आपसे मुह पर तो मीठी बाते करते है लेकिन पीठ पीछे आपको बर्बाद करने की योजना बनाते है. ऐसा करने वाले तो उस विष के घड़े के समान है जिसकी उपरी सतह पर दूध है.
एक बुरे सहकारी पर विश्वास ना करे. एक सामान्य मित्र पर भी विश्वास ना करे. यदि ऐसे लोग आप पर गुस्सा होते है तो आप के सभी राज वो खोल देंगे.
आप जिस बात को करना चाहते है किसीसे ना कहे. उसे प्रकट ना करते हुए दृढ़ता के साथ काम में लग जाए.
मुर्खता दुखदायी है, जवानी तो दुखदायी है ही ( यहाँ संकेत मन की उन्मत्त अवस्था की और होना चाहिए) , लेकिन इससे कही ज्यादा दुखदायी किसी दुसरे के घर जाकर उससे अहसान लेना है.
हर पहाड़ पर मणी कहा. हर हाथी के सर पर मणी कहा. उसी तरह साधू हर जगह कहा. हर वन में चन्दन के वृक्ष कहा.
बुद्धिमान जनों ने अपने बच्चो को नीतिमत्ता की सीख देनी छाहिये. जो बच्चो को नीति शास्त्र का ज्ञान होता है और जो अच्छा व्यवहार करते है वे घर के सम्मान को बढाते है.
जो पालक अपने बच्चो को शिक्षा नहीं देते है वो तो बच्चो के शत्रु है. जिस प्रकार बगुले हंसो की सभा में सम्मान पाते है, उसी प्रकार अज्ञानी पुत्र लोगो की सभा में शोभा देते है.
लाड प्यार से बच्चो में गलत आदते ढलती है. उन्हें कड़ी शिक्षा देने से वे अच्छी आदते सीखते है. इसीलिए बच्चो को दण्डित करे, ज्यादा लाड ना करे.
ऐसा एक भी दिन ना जाये जब आपने एक श्लोक, आधा श्लोक, चौथाई श्लोक, या केवल श्लोक का एक अक्षर नहीं सिखा, या आपने दान, अभ्यास या कोई पवित्र कार्य नहीं किया.
पत्नी से विभक्त होना, आपने ही लोगो से बे-इज्जत होना, युद्ध में शत्रु को बचाना, दुष्ट राजा के यहाँ चाकरी करना, गरीबी एवं सभा में दुर्व्यवस्था – ये छह बाते ऐसी है जो यदि किसी व्यक्ति में है तो उसे बिना अग्नि के ही जला देती है.
नदी के किनारे बसे हुए झाड , दुसरे व्यक्ति के घर में रहने वाली औरत एवं राजा जिसके पास मंत्री नहीं है – ये सब तेजी से विनाश को पाते है.
एक ब्राह्मण की शक्ति उसके अध्ययन में है, एक राजा की शक्ति उसकी सेना में है. एक वैश्य की शक्ति उसकी दौलत में है. एक शुद्र की शक्ति उसकी सेवा परायणता में है.
वेश्या निर्धन व्यक्ति को छोड़कर चली जाती है. जनता राजा को छोड़कर चली जाती है यदि राजा उनकी रक्षा नहीं कर सकता. पक्षी उस वृक्ष को छोड़ देते है जिस पर कोई फल नहीं. मेहमान भोजन करने के बाद घर से चल पड़ते है.

ब्राह्मण आपने यजमानो को दक्षिणा मिलने के बाद छोड़ देते है. विद्यार्थी शिक्षकको को विद्यार्जन के बाद छोड़ देते है. प्राणी वन जलने के बाद उसे छोड़ देते है.

जो ऐसे व्यक्ति से मित्रता करता है जो व्यवहार में दुष्ट हो, जिसकी दृष्टी में खोट हो और जो माना हुआ शातिर हो, तो वह तेजी से बर्बाद होता है.
बराबरी वालो से मैत्री बहरती है. राजा के यहाँ नौकरी करने वाले को इज्जत होती है. जब हम लोगो से व्यवहार करते है तो हमें लेन देन समझना चाहिए. एक रूपवान स्त्री आपने घर में सुरक्षीत होती है.
Chapter III

इस दुनिया में ऐसा किसका घर है जिस पर कोई कलंक नहीं. वह कौन है जो व्याधि और दुख से मुक्त है.

आदमी का कुल इन बातो से नापा जा सकता है..१. उसका व्यवहार २. उसका देश ३. उसकी भाषा के उच्चार.
उसकी मित्रता उसके सौहार्द्र पूर्ण व्यवहार से और उसके मुख मंडल की प्रसन्नता से नापी जा सकती है.
आदमी के शारीर को देखकर उसकी खाने की क्षमता का पता लगता है.
आपकी लड़की का ब्याह अच्छे खानदान में करे. आपके बच्चे को अच्छी शिक्षा दे. आपके शत्रु को दुःख से भर दे. आपके मित्रो को धर्म में प्रवृत्त करे.
एक लफंगे और एक साप में यह अंतर है की साप तभी डंख मरेगा जब उसकी जान को खतरा हो. और लफंगा जब भी मौका मिले.
इसीलिए राजा लोग अपने आस पास अच्छे घर के लोगो को रखते है. ऐसे लोग ना आरम्भ में ना बीच में ना अंत में साथ छोड़कर जाते है.
जब प्रलय का समय आता है तो समुद्र अपनी मर्यादा छोड़कर बदल जाते है, लेकिन संतजन नहीं बदलते.
मुर्ख के साथ सम्बन्ध ना रखे. हमें पता है मुर्ख व्यक्ति दो पैरो वाला जानवर है. ना दिखने वाले काटे के सामान वह धारदार वचनों से ह्रदय को छलनी करता है.
जो लोग ख़ूबसूरत और जवान है, बड़े घरो में पैदा हुए है, लेकिन जिनके पास विद्या नहीं है, वो पलाश के फूल के समान है जिन्हें कोई खुशबु नहीं.
कोकिल की सुन्दरता उसके गायन में है. एक स्त्री की सुन्दरता उसके अपने परिवार के प्रति समर्पण में है. एक बदसूरत आदमी की सुन्दरता उसके ज्ञान में है. एक तपस्वी के सुन्दरता उसकी क्षमाशीलता में है.
घर को बचाने के लिए एक सदस्य का बलिदान दे
गाव को बचाने के लिए एक घर का बलिदान दे
देश को बचाने के लिए एक गाव का बलिदान दे.
आत्मा को बचाने के लिए देश का बलिदान दे.
जो उद्यमशील है वे गरीब नहीं हो सकते.
जो हरदम भगवान् को याद करते है उन्हें पाप नहीं छू सकता.
जो मौन रहते है वो विवाद में नहीं पड़ते.
जो जागृत रहते है वो निर्भय होते है.
जो शक्तिशाली है उसके लिए ना उठाने लायक क्या है.
जो प्रयत्न में लगे रहते है उनके लिए कौनसा सफ़र मुश्किल है
जो विद्यार्जन में लगा रहता है उसके लिए कौनसा देश अपना नहीं
जो हरदम मीठे शब्द बोलता है उसका शत्रु कौन है.
सारा वन केवल एक वृक्ष से महक जाता है. एक ऐसे वृक्ष से जो सुगंधी पुष्पों से बहर गया हो. उसी प्रकार केवल एक गुणवान पुत्र से संपूर्ण परिवार कीर्ति को प्राप्त होता है.
यदि केवल एक सुखा हुआ वृक्ष जला दिया जाए तो सम्पूर्ण वन जल जाता है. उसी प्रकार एक बदमाश पुत्र सम्पूर्ण घर का सत्यानाश कर देता है.
रात कितनी हसीन लगती है जब चाँद रोशन होता है. उसी प्रकार सम्पूर्ण परिवार एक विद्वान् और पुण्यात्मा पुत्र के कारण खिल जाता है.
ऐसे अनेक पुत्र किस काम के जो दुःख और निराशा पैदा करे. इससे तो वह एक ही पुत्र अच्छा जो सम्पूर्ण घर को सहारा और शांति प्रदान करे.
आपका बच्चा पांच साल का हो तब तक उसे लाड से पाले. दस साल तक उसे छड़ी की मार से डराए. लेकिन जब वह १६ साल का हो जाए तो उससे मित्र के समान व्यवहार करे.
वह व्यक्ति सुरक्षित रह सकता है जो नीछे दी हुई परिस्थिति उत्पन्न होने पर भाग जाए….
१. भयावह आपदा.
२. विदेशी आक्रमण
३. भयंकर अकाल
४. दुष्ट व्यक्ति का संग.
जो व्यक्ति निम्नलिखित बाते अर्जित नहीं करता वह बार बार जन्म लेकर मरता है.
१. धर्मं
२. अर्थ
३. काम
४. मोक्ष
लक्ष्मी जो संपत्ति की देवता है अपने आप वहा चली आती है जहा …
१. मूर्खो का सम्मान नहीं होता.
२. अनाज का अच्छे से भण्डारण किया जाता है.
३. पति, पत्नी में आपस में लड़ाई बखेड़ा नहीं होता है.

Chapter IV

यह बाते माता के गर्भ में ही निश्चित हो जाती है….
१. व्यक्ति कितने साल जियेगा २. वह किस प्रकार का काम करेगा ३. उसके पास संपत्ति कितनी होगी ४. वह कब मरेगा.
ऐसा लगता है की नीतीकार यहाँ गर्भ संस्कार की महिमा बताने के लिए इस बात को कह रहे है हमें अकर्मण्य बनाने के लिए नहीं.

बच्चे, मित्र, सगे सम्बन्धी भगवान् के भक्त को देखकर दूर भागते है. लेकिन जो ऐसे व्यक्ति का कहा मानते है उनमे भक्ति जागृत होती है और वे अपने परिवार का भला करते है.
मछली, कछुआ और पंछी अपने बच्चो को दृष्टी से, ध्यान देकर और स्पर्श करके पालते है. संतजन अपने अनुयायियों को इसी तरह सुरक्षा प्रदान करते है.
जब आपका शरीर स्वस्थ है और आपके नियंत्रण में है उसी समय आत्मसाक्षात्कार की कोशीश करे. जब मृत्यु बस आने ही वाली है तो आप क्या कर सकते है.
विद्या अर्जन करना यह एक कामधेनु के समान है. वह हर मौसम में अमृत प्रदान करती है. वह माता के समान तुम्हे इस जिंदगी के सफ़र में दूध पिलाती है. इसीलिए पढ़ाई मानो एक गुप्त धन है.
एक पुत्र जो गुणी है वह सौ गुणरहित बच्चो से अच्छा है. उसी प्रकार जैसे एक चन्द्रमा रात्रि के अन्धकार को भगाता है, असंख्य तारे यह काम नहीं करते.
एक ऐसा बालक जो जन्मते वक़्त मृत था, एक मुर्ख दीर्घायुषी बालक से बेहतर है. पहला बालक तो एक क्षण के लिए दुःख देता है, दूसरा बालक उसके माँ बाप को जिंदगी भर दुःख की अग्नि में जलाता है.
निम्नलिखित बाते व्यक्ति को बिना आग के ही जलाती है…
१. एक छोटे गाव में बसना जहा रहने की सुविधाए उपलब्ध नहीं.
२. एक ऐसे व्यक्ति की चाकरी करना जो नीच कुल में पैदा हुआ है.
३. अस्वास्थय्वर्धक भोजन का सेवन करना.
४. जिसकी पत्नी हरदम गुस्से में होती है.
५. जिसको मुर्ख पुत्र है.
६. जिसकी पुत्री विधवा हो गयी है.
वह गाय किस काम की जो ना तो दूध देती है ना तो बच्चे को जन्म देती है. उसी प्रकार उस बच्चे का जन्म किस काम का जो ना ही विद्वान हुआ ना ही भगवान् का भक्त हुआ.
यहाँ नीतिकार गो मूत्र के उपयोग को अनदेखा कर रहे है, जिससे अनुवादक सहमत नहीं.
जब व्यक्ति जीवन के दुःख से झुलसता है तो यह बाते उसको सहारा देती है…
१. पुत्र और पुत्री २. पत्नी ३. भगवान् के भक्त.
यह बाते एक बार ही होनी चाहिए..
१. राजा का बोलना.
२. बिद्वान व्यक्ति का बोलना.
३. लड़की का ब्याहना.
जब आप तप करते है तो अकेले करे.
अभ्यास करते है तो दुसरे के साथ करे.
गायन करते है तो तीन लोग करे.
कृषि चार लोग करे.
युद्ध अनेक लोग मिलकर करे.
वही अच्छी पत्नी है जो शुचिपूर्ण है, पारंगत है, शुद्ध है, पति को प्रसन्न करने वाली है और सत्यवादी है.
जिस व्यक्ति के पुत्र नहीं है उसका घर उजाड़ है. जिसे कोई सम्बन्धी नहीं है उसकी सभी दिशाए उजाड़ है. मुर्ख व्यक्ति का ह्रदय उजाड़ है. निर्धन व्यक्ति का सब कुछ उजाड़ है.
जिस अध्यात्मिक सीख का आचरण नहीं किया जाता वह जहर है. जिसका पेट ख़राब है उसके लिए भोजन जहर है. निर्धन व्यक्ति के लिए लोगो का किसी सामाजिक या व्यक्तिगत कार्यक्रम में एकत्र होना जहर है.
जिस व्यक्ति के पास धर्म और दया नहीं है उसे दूर करो. जिस गुरु के पास अध्यात्मिक ज्ञान नहीं है उसे दूर करो. जिस पत्नी के चेहरे पर हरदम घृणा है उसे दूर करो. जिन रिश्तेदारों के पास प्रेम नहीं उन्हें दूर करो.
सतत भ्रमण करना व्यक्ति को बूढ़ा बना देता है. यदि घोड़े को हरदम बांध कर रखते है तो वह बूढा हो जाता है. यदि स्त्री उसके पति के साथ प्रणय नहीं करती हो तो बुढी हो जाती है. धुप में रखने से कपडे पुराने हो जाते है.
इन बातो को बार बार गौर करे…
सही समय
सही मित्र
सही ठिकाना
पैसे कमाने के सही साधन
पैसे खर्चा करने के सही तरीके
आपके उर्जा स्रोत.
द्विज अग्नि में भगवान् देखते है.
भक्तो के ह्रदय में परमात्मा का वास होता है.
जो अल्प मति के लोग है वो मूर्ति में भगवान् देखते है.
लेकिन जो व्यापक दृष्टी रखने वाले लोग है, वो यह जानते है की भगवान सर्व व्यापी है.
Chapter V

द्विज अग्नि की पूजा करे.
दुसरे लोग ब्राह्मण की पूजा करे. ( अनुवादक को लगता है की पूजे जाने का अधिकार केवल शुभ आचरण से ही प्राप्त हो सकता है.)
पत्नी पति की पूजा करे. (अनुवादक का मत है की दोनों एक दुसरे की पूजा करे)
दोपहर के भोजन के लिए जो अतिथि आये उसकी सभी पूजा करे.

सोने की परख उसे घिस कर, काट कर, गरम कर के और पीट कर की जाती है.
उसी तरह व्यक्ति का परीक्षण वह कितना त्याग करता है, उसका आचरण कैसा है, उसमे गुण कौनसे है और उसका व्यवहार कैसा है इससे होता है.
यदि आप पर मुसीबत आती नहीं है तो उससे सावधान रहे. लेकिन यदि मुसीबत आ जाती है तो किसी भी तरह उससे छुटकारा पाए.
अनेक व्यक्ति जो एक ही गर्भ से पैदा हुए है या एक ही नक्षत्र में पैदा हुए है वे एकसे नहीं रहते. उसी प्रकार जैसे बेर के झाड के सभी बेर एक से नहीं रहते.
वह व्यक्ति जिसके हाथ स्वच्छ है कार्यालय में काम नहीं करना चाहता. जिस ने अपनी कामना को ख़तम कर दिया है, वह शारीरिक शृंगार नहीं करता. जो आधा पढ़ा हुआ व्यक्ति है वो मीठे बोल बोल नहीं सकता. जो सीधी बात करता है वह धोका नहीं दे सकता.
मूढ़ लोग बुद्धिमानो से इर्ष्या करते है. गलत मार्ग पर चलने वाली औरत पवित्र स्त्री से इर्ष्या करती है. बदसूरत औरत खुबसूरत औरत से इर्ष्या करती है.
खाली बैठने से अभ्यास का नाश होता है. दुसरो को देखभाल करने के लिए देने से पैसा नष्ट होता है. गलत ढंग से बुवाई करने वाला किसान अपने बीजो का नाश करता है. यदि सेनापति नहीं है तो सेना का नाश होता है.
अर्जित विद्या अभ्यास से सुरक्षित रहती है.
घर की इज्जत अच्छे व्यवहार से सुरक्षित रहती है.
अच्छे गुणों से इज्जतदार आदमी को मान मिलता है.
किसीभी व्यक्ति का गुस्सा उसकी आँखों में दिखता है.
धर्मं की रक्षा पैसे से होती है.
ज्ञान की रक्षा जमकर आजमाने से होती है.
राजा से रक्षा उसकी बात मानने से होती है.
घर की रक्षा एक दक्ष गृहिणी से होती है.
जो वैदिक ज्ञान की निंदा करते है, शास्र्त सम्मत जीवनशैली की मजाक उड़ाते है, शांतीपूर्ण स्वभाव के लोगो की मजाक उड़ाते है, बिना किसी आवश्यकता के दुःख को प्राप्त होते है.
दान गरीबी को ख़त्म करता है. अच्छा आचरण दुःख को मिटाता है. विवेक अज्ञान को नष्ट करता है. जानकारी भय को समाप्त करती है.
वासना के समान दुष्कर कोई रोग नहीं. मोह के समान कोई शत्रु नहीं. क्रोध के समान अग्नि नहीं. स्वरुप ज्ञान के समान कोई बोध नहीं.
व्यक्ति अकेले ही पैदा होता है. अकेले ही मरता है. अपने कर्मो के शुभ अशुभ परिणाम अकेले ही भोगता है. अकेले ही नरक में जाता है या सदगति प्राप्त करता है.
जिसने अपने स्वरुप को जान लिया उसके लिए स्वर्ग तो तिनके के समान है. एक पराक्रमी योद्धा अपने जीवन को तुच्छ मानता है. जिसने अपनी कामना को जीत लिया उसके लिए स्त्री भोग का विषय नहीं. उसके लिए सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड तुच्छ है जिसके मन में कोई आसक्ति नहीं.
जब आप सफ़र पर जाते हो तो विद्यार्जन ही आपका मित्र है. घर में पत्नी मित्र है. बीमार होने पर दवा मित्र है. अर्जित पुण्य मृत्यु के बाद एकमात्र मित्र है.
समुद्र में होने वाली वर्षा व्यर्थ है. जिसका पेट भरा हुआ है उसके लिए अन्न व्यर्थ है. पैसे वाले आदमी के लिए भेट वस्तु का कोई अर्थ नहीं. दिन के समय जलता दिया व्यर्थ है.
वर्षा के जल के समान कोई जल नहीं. खुदकी शक्ति के समान कोई शक्ति नहीं. नेत्र ज्योति के समान कोई प्रकाश नहीं. अन्न से बढ़कर कोई संपत्ति नहीं.
निर्धन को धन की कामना. पशु को वाणी की कामना. लोगो को स्वर्ग की कामना. देव लोगो को मुक्ति की कामना.
सत्य की शक्ति ही इस दुनिया को धारण करती है. सत्य की शक्ति से ही सूर्य प्रकाशमान है, हवाए चलती है, सही में सब कुछ सत्य पर आश्रित है.
लक्ष्मी जो संपत्ति की देवता है, वह चंचला है. हमारी श्वास भी चंचला है. हम कितना समय जियेंगे इसका कोई ठिकाना नहीं. हम कहा रहेंगे यह भी पक्का नहीं. कोई बात यहाँ पर पक्की है तो यह है की हमारा अर्जित पुण्य कितना है.
आदमियों में नाई सबसे धूर्त है. कौवा पक्षीयों में धूर्त है. लोमड़ी प्राणीयो में धूर्त है. औरतो में लम्पट औरत सबसे धूर्त है.
ये सब आपके बाप है…१. जिसने आपको जन्म दिया. २. जिसने आपका यज्ञोपवित संस्कार किया. ३. जिसने आपको पढाया. ४. जिसने आपको भोजन दिया. ५. जिसने आपको भयपूर्ण परिस्थितियों में बचाया.
ये सब आपकी माँ है…१. राजा की पत्नी २. गुरु की पत्नी ३. मित्र की पत्नी ४. पत्नी की माँ ४. आपकी माँ.
Chapter VI

श्रवण करने से धर्मं का ज्ञान होता है, द्वेष दूर होता है, ज्ञान की प्राप्ति होती है और माया की आसक्ति से मुक्ति होती है.

पक्षीयों में कौवा नीच है. पशुओ में कुत्ता नीच है. जो तपस्वी पाप करता है वो घिनौना है. लेकिन जो दूसरो की निंदा करता है वह सबसे बड़ा चांडाल है.
राख से घिसने पर पीतल चमकता है . ताम्बा इमली से साफ़ होता है. औरते प्रदर से शुद्ध होती है. नदी बहती रहे तो साफ़ रहती है.
राजा, ब्राह्मण और तपस्वी योगी जब दुसरे देश जाते है, तो आदर पाते है. लेकिन औरत यदि भटक जाती है तो बर्बाद हो जाती है.
धनवान व्यक्ति के कई मित्र होते है. उसके कई सम्बन्धी भी होते है. धनवान को ही आदमी कहा जाता है और पैसेवालों को ही पंडित कह कर नवाजा जाता है.
सर्व शक्तिमान के इच्छा से ही बुद्धि काम करती है, वही कर्मो को नियंत्रीत करता है. उसी की इच्छा से आस पास में मदद करने वाले आ जाते है.
काल सभी जीवो को निपुणता प्रदान करता है. वही सभी जीवो का संहार भी करता है. वह जागता रहता है जब सब सो जाते है. काल को कोई जीत नहीं सकता.
जो जन्म से अंध है वो देख नहीं सकते. उसी तरह जो वासना के अधीन है वो भी देख नहीं सकते. अहंकारी व्यक्ति को कभी ऐसा नहीं लगता की वह कुछ बुरा कर रहा है. और जो पैसे के पीछे पड़े है उनको उनके कर्मो में कोई पाप दिखाई नहीं देता.
जीवात्मा अपने कर्म के मार्ग से जाता है. और जो भी भले बुरे परिणाम कर्मो के आते है उन्हें भोगता है. अपने ही कर्मो से वह संसार में बंधता है और अपने ही कर्मो से बन्धनों से छूटता है.
राजा को उसके नागरिको के पाप लगते है. राजा के यहाँ काम करने वाले पुजारी को राजा के पाप लगते है. पति को पत्नी के पाप लगते है. गुरु को उसके शिष्यों के पाप लगते है.
अपने ही घर में व्यक्ति के ये शत्रु हो सकते है…
उसका बाप यदि वह हरदम कर्ज में डूबा रहता है.
उसकी माँ यदि वह दुसरे पुरुष से संग करती है.
सुन्दर पत्नी
वह लड़का जिसने शिक्षा प्राप्त नहीं की.
एक लालची आदमी को भेट वास्तु दे कर संतुष्ट करे. एक कठोर आदमी को हाथ जोड़कर संतुष्ट करे. एक मुर्ख को सम्मान देकर संतुष्ट करे. एक विद्वान् आदमी को सच बोलकर संतुष्ट करे.
एक बेकार राज्य का राजा होने से यह बेहतर है की व्यक्ति किसी राज्य का राजा ना हो.
एक पापी का मित्र होने से बेहतर है की बिना मित्र का हो.
एक मुर्ख का गुरु होने से बेहतर है की बिना शिष्य वाला हो.
एक बुरीं पत्नी होने से बेहतर है की बिना पत्नी वाला हो.
एक बेकार राज्य में लोग सुखी कैसे हो? एक पापी से किसी शान्ति की प्राप्ति कैसे हो? एक बुरी पत्नी के साथ घर में कौनसा सुख प्राप्त हो सकता है. एक नालायक शिष्य को शिक्षा देकर कैसे कीर्ति प्राप्त हो?
शेर से एक बात सीखे. बगुले से एक. मुर्गे से चार. कौवे से पाच. कुत्ते से छह. और गधे से तीन.
शेर से यह बढ़िया बात सीखे की आप जो भी करना चाहते हो एकदिली से और जबरदस्त प्रयास से करे.
बुद्धिमान व्यक्ति अपने इन्द्रियों को बगुले की तरह वश में करते हुए अपने लक्ष्य को जगह, समय और योग्यता का पूरा ध्यान रखते हुए पूर्ण करे.
मुर्गे से हे चार बाते सीखे…
१. सही समय पर उठे. २. नीडर बने और लढ़े. ३. संपत्ति का रिश्तेदारों से उचित बटवारा करे. ४. अपने कष्ट से अपना रोजगार प्राप्त करे.
कौवे से ये पाच बाते सीखे… १. अपनी पत्नी के साथ एकांत में प्रणय करे. २. नीडरता ३. उपयोगी वस्तुओ का संचय करे. ४. सभी ओर दृष्टी घुमाये. ५. दुसरो पर आसानी से विश्वास ना करे.
कुत्ते से ये बाते सीखे १. बहुत भूख हो पर खाने को कुछ ना मिले या कम मिले तो भी संतोष करे. २. गाढ़ी नींद में हो तो भी क्षण में उठ जाए. ३. अपने स्वामी के प्रति बेहिचक इमानदारी रखे ४. नीडरता.
गधे से ये तीन बाते सीखे. १. अपना बोझा ढोना ना छोड़े. २. सर्दी गर्मी की चिंता ना करे. ३. सदा संतुष्ट रहे.
जो व्यक्ति इन बीस गुणों पर अमल करेगा वह जो भी करेगा सफल होगा.
Chapter VII

एक बुद्धिमान व्यक्ति यह बाते किसी को ना बताये…
१. की उसकी दौलत खो चुकी है.
२. उसे क्रोध आ गया है.
३. उसकी पत्नी ने जो गलत व्यवहार किया.
४. लोगो ने उसे जो गालिया दी.
५. वह किस प्रकार बेइज्जत हुआ है.

जो व्यक्ति आर्थिक व्यवहार करने में, ज्ञान अर्जन करने में, खाने में और काम-धंदा करने में शर्माता नहीं है वो सुखी हो जाता है.
जो सुख और शांति का अनुभव स्वरुप ज्ञान को प्राप्त करने से होता है, वैसा अनुभव जो लोभी लोग धन के लोभ में यहाँ वहा भटकते रहते है उन्हें नहीं होता.
व्यक्ति नीचे दी हुए ३ चीजो से संतुष्ट रहे…
१. खुदकी पत्नी २. वह भोजन जो विधाता ने प्रदान किया. ३. उतना धन जितना इमानदारी से मिल गया.
लेकिन व्यक्ति को नीचे दी हुई ३ चीजो से संतुष्ट नहीं होना चाहिए…
१. अभ्यास २. भगवान् का नाम स्मरण. ३. परोपकार
इन दोनों के मध्य से कभी ना जाए..
१. दो ब्राह्मण.
२. ब्राह्मण और उसके यज्ञ में जलने वाली अग्नि.
३. पति पत्नी.
४. स्वामी और उसका चाकर.
५. हल और बैल.
अपना पैर कभी भी इनसे न छूने दे…१. अग्नि २. अध्यात्मिक गुरु ३. ब्राह्मण ४. गाय ५. एक कुमारिका ६. एक उम्र में बड़ा आदमी. ५. एक बच्चा.
हाथी से हजार गज की दुरी रखे.
घोड़े से सौ की.
सिंग वाले जानवर से दस की.
लेकिन दुष्ट जहा हो उस जगह से ही निकल जाए.
हाथी को अंकुश से नियंत्रित करे.
घोड़े को थप थपा के.
सिंग वाले जानवर को डंडा दिखा के.
एक बदमाश को तलवार से.
ब्राह्मण अच्छे भोजन से तृप्त होते है. मोर मेघ गर्जना से. साधू दुसरो की सम्पन्नता देखकर और दुष्ट दुसरो की विपदा देखकर.
एक शक्तिशाली आदमी से उसकी बात मानकर समझौता करे. एक दुष्ट का प्रतिकार करे. और जिनकी शक्ति आपकी शक्ति के बराबर है उनसे समझौता विनम्रता से या कठोरता से करे.
एक राजा की शक्ति उसकी शक्तिशाली भुजाओ में है. एक ब्राह्मण की शक्ति उसके स्वरुप ज्ञान में है. एक स्त्री की शक्ति उसकी सुन्दरता, तारुण्य और मीठे वचनों में है.
अपने व्यवहार में बहुत सीधे ना रहे. आप यदि वन जाकर देखते है तो पायेंगे की जो पेड़ सीधे उगे उन्हें काट लिया गया और जो पेड़ आड़े तिरछे है वो खड़े है.
हंस वहा रहते है जहा पानी होता है. पानी सूखने पर वे उस जगह को छोड़ देते है. आप किसी आदमी को ऐसा व्यवहार ना करने दे की वह आपके पास आता जाता रहे.
संचित धन खर्च करने से बढ़ता है. उसी प्रकार जैसे ताजा जल जो अभी आया है बचता है, यदि पुराने स्थिर जल को निकल बहार किया जाये.
वह व्यक्ति जिसके पास धन है उसके पास मित्र और सम्बन्धी भी बहोत रहते है. वही इस दुनिया में टिक पाता है और उसीको इज्जत मिलती है.
स्वर्ग में निवास करने वाले देवता लोगो में और धरती पर निवास करने वाले लोगो में कुछ साम्य पाया जाता है.
उनके समान गुण है १. परोपकार २. मीठे वचन ३. भगवान् की आराधना. ४. ब्राह्मणों के जरूरतों की पूर्ति.
नरक में निवास करने वाले और धरती पर निवास करने वालो में साम्यता – १. अत्याधिक क्रोध २. कठोर वचन ३. अपने ही संबंधियों से शत्रुता ४. नीच लोगो से मैत्री ५. हीन हरकते करने वालो की चाकरी.
यदि आप शेर की गुफा में जाते हो तो आप को हाथी के माथे का मणि मिल सकता है. लेकिन यदि आप लोमड़ी जहा रहती है वहा जाते हो तो बछड़े की पूछ या गधे की हड्डी के अलावा कुछ नहीं मिलेगा.
एक अनपढ़ आदमी की जिंदगी किसी कुत्ते की पूछ की तरह बेकार है. उससे ना उसकी इज्जत ही ढकती है और ना ही कीड़े मक्खियों को भागने के काम आती है.
यदि आप दिव्यता चाहते है तो आपके वाचा, मन और इन्द्रियों में शुद्धता होनी चाहिए. उसी प्रकार आपके ह्रदय में करुणा होनी चाहिए.
जीस प्रकार एक फूल में खुशबु है. तील में तेल है. लकड़ी में अग्नि है. दूध में घी है. गन्ने में गुड है. उसी प्रकार यदि आप ठीक से देखते हो तो हर व्यक्ति में परमात्मा है.
Chanakya Neeti Shastra – Aathwa Adhyay

नीच वर्ग के लोग दौलत चाहते है, मध्यम वर्ग के दौलत और इज्जत, लेकिन उच्च वर्ग के लोग सम्मान चाहते है क्यों की सम्मान ही उच्च लोगो की असली दौलत है.

दीपक अँधेरे का भक्षण करता है इसीलिए काला धुआ बनाता है. इसी प्रकार हम जिस प्रकार का अन्न खाते है. माने सात्विक, राजसिक, तामसिक उसी प्रकार के विचार उत्पन्न करते है.
हे विद्वान् पुरुष ! अपनी संपत्ति केवल पात्र को ही दे और दूसरो को कभी ना दे. जो जल बादल को समुद्र देता है वह बड़ा मीठा होता है. बादल वर्षा करके वह जल पृथ्वी के सभी चल अचल जीवो को देता है और फिर उसे समुद्र को लौटा देता है.
विद्वान् लोग जो तत्त्व को जानने वाले है उन्होंने कहा है की मास खाने वाले चांडालो से हजार गुना नीच है. इसलिए ऐसे आदमी से नीच कोई नहीं.
शरीर पर मालिश करने के बाद, स्मशान में चिता का धुआ शरीर पर आने के बाद, सम्भोग करने के बाद, दाढ़ी बनाने के बाद जब तक आदमी नहा ना ले वह चांडाल रहता है.
जल अपच की दवा है. जल चैतन्य निर्माण करता है, यदि उसे भोजन पच जाने के बाद पीते है. पानी को भोजन के बाद तुरंत पीना विष पिने के समान है.
यदि ज्ञान को उपयोग में ना लाया जाए तो वह खो जाता है. आदमी यदि अज्ञानी है तो खो जाता है. सेनापति के बिना सेना खो जाती है. पति के बिना पत्नी खो जाती है.
वह आदमी अभागा है जो अपने बुढ़ापे में पत्नी की मृत्यु देखता है. वह भी अभागा है जो अपनी सम्पदा संबंधियों को सौप देता है. वह भी अभागा है जो खाने के लिए दुसरो पर निर्भर है.
यह बाते बेकार है. वेद मंत्रो का उच्चारण करना लेकिन निहित यज्ञ कर्मो को ना करना. यज्ञ करना लेकिन बाद में लोगो को दान दे कर तृप्त ना करना. पूर्णता तो भक्ति से ही आती है. भक्ति ही सभी सफलताओ का मूल है.
एक संयमित मन के समान कोई तप नहीं. संतोष के समान कोई सुख नहीं. लोभ के समान कोई रोग नहीं. दया के समान कोई गुण नहीं.
क्रोध साक्षात् यम है. तृष्णा नरक की और ले जाने वाली वैतरणी है. ज्ञान कामधेनु है. संतोष ही तो नंदनवन है.
नीति की उत्तमता ही व्यक्ति के सौंदर्य का गहना है. उत्तम आचरण से व्यक्ति उत्तरोत्तर ऊँचे लोक में जाता है. सफलता ही विद्या का आभूषण है. उचित विनियोग ही संपत्ति का गहना है.
निति भ्रष्ट होने से सुन्दरता का नाश होता है. हीन आचरण से अच्छे कुल का नाश होता है. पूर्णता न आने से विद्या का नाश होता है. उचित विनियोग के बिना धन का नाश होता है.
जो जल धरती में समां गया वो शुद्ध है. परिवार को समर्पित पत्नी शुद्ध है. लोगो का कल्याण करने वाला राजा शुद्ध है. वह ब्राह्मण शुद्ध है जो संतुष्ट है.
असंतुष्ट ब्राह्मण, संतुष्ट राजा, लज्जा रखने वाली वेश्या, कठोर आचरण करने वाली गृहिणी ये सभी लोग विनाश को प्राप्त होते है.
क्या करना उचे कुल का यदि बुद्धिमत्ता ना हो. एक नीच कुल में उत्पन्न होने वाले विद्वान् व्यक्ति का सम्मान देवता भी करते है.
विद्वान् व्यक्ति लोगो से सम्मान पाता है. विद्वान् उसकी विद्वत्ता के लिए हर जगह सम्मान पाता है. यह बिलकुल सच है की विद्या हर जगह सम्मानित है.
जो लोग दिखने में सुन्दर है, जवान है, ऊँचे कुल में पैदा हुए है, वो बेकार है यदि उनके पास विद्या नहीं है. वो तो पलाश के फूल के समान है जो दिखते तो अच्छे है पर महकते नहीं.
यह धरती उन लोगो के भार से दबी जा रही है, जो मास खाते है, दारू पीते है, बेवकूफ है, वे सब तो आदमी होते हुए पशु ही है.
उस यज्ञ के समान कोई शत्रु नहीं जिसके उपरांत लोगो को बड़े पैमाने पर भोजन ना कराया जाए. ऐसा यज्ञ राज्यों को ख़तम कर देता है. यदि पुरोहित यज्ञ में ठीक से उच्चारण ना करे तो यज्ञ उसे ख़तम कर देता है. और यदि यजमान लोगो को दान एवं भेटवस्तू ना दे तो वह भी यज्ञ द्वारा ख़तम हो जाता है.
Chanakya Neeti Shastra – Nawwa Adhyay

तात, यदि तुम जन्म मरण के चक्र से मुक्त होना चाहते हो तो जिन विषयो के पीछे तुम इन्द्रियों की संतुष्टि के लिए भागते फिरते हो उन्हें ऐसे त्याग दो जैसे तुम विष को त्याग देते हो. इन सब को छोड़कर हे तात तितिक्षा, ईमानदारी का आचरण, दया, शुचिता और सत्य इसका अमृत पियो.

वो कमीने लोग जो दूसरो की गुप्त खामियों को उजागर करते हुए फिरते है, उसी तरह नष्ट हो जाते है जिस तरह कोई साप चीटियों के टीलों में जा कर मर जाता है.
शायद किसीने ब्रह्माजी, जो इस सृष्टि के निर्माता है, को यह सलाह नहीं दी की वह …
सुवर्ण को सुगंध प्रदान करे.
गन्ने के झाड को फल प्रदान करे.
चन्दन के वृक्ष को फूल प्रदान करे.
विद्वान् को धन प्रदान करे.
राजा को लम्बी आयु प्रदान करे.
अमृत सबसे बढ़िया औषधि है.
इन्द्रिय सुख में अच्छा भोजन सर्वश्रेष्ठ सुख है.
नेत्र सभी इन्द्रियों में श्रेष्ठ है.
मस्तक शरीर के सभी भागो मे श्रेष्ठ है.
कोई संदेशवाहक आकाश में जा नहीं सकता और आकाश से कोई खबर आ नहीं सकती. वहा रहने वाले लोगो की आवाज सुनाई नहीं देती. और उनके साथ कोई संपर्क नहीं हो सकता. इसीलिए वह ब्राह्मण जो सूर्य और चन्द्र ग्रहण की भविष्य वाणी करता है, उसे विद्वान मानना चाहिए.
इन सातो को जगा दे यदि ये सो जाए…
१. विद्यार्थी २. सेवक ३. पथिक ४. भूखा आदमी ५. डरा हुआ आदमी ६. खजाने का रक्षक ७. खजांची
इन सातो को नींद से नहीं जगाना चाहिए…
१. साप २. राजा ३. बाघ ४. डंख करने वाला कीड़ा ५. छोटा बच्चा ६. दुसरो का कुत्ता ७. मुर्ख
जिन्होंने वेदों का अध्ययन पैसा कमाने के लिए किया और जो नीच काम करने वाले लोगो का दिया हुआ अन्न खाते है उनके पास कौनसी शक्ति हो सकती है. वो ऐसे भुजंगो के समान है जो दंश नहीं कर सकते.
जिसके डाटने से सामने वाले के मन में डर नहीं पैदा होता और प्रसन्न होने के बाद जो सामने वाले को कुछ देता नहीं है. वो ना किसी की रक्षा कर सकता है ना किसी को नियंत्रित कर सकता है. ऐसा आदमी भला क्या कर सकता है.
यदि नाग अपना फना खड़ा करे तो भले ही वह जहरीला ना हो तो भी उसका यह करना सामने वाले के मन में डर पैदा करने को पर्याप्त है. यहाँ यह बात कोई माइना नहीं रखती की वह जहरीला है की नहीं.
सुबह उठकर दिन भर जो दाव आप लगाने वाले है उसके बारे में सोचे. दोपहर को अपनी माँ को याद करे. रात को चोरो को ना भूले.
आपको इन्द्र के समान वैभव प्राप्त होगा यदि आप..
अपने भगवान् के गले की माला अपने हाथो से बनाये.
अपने भगवान् के लिए चन्दन अपने हाथो से घिसे.
अपने हाथो से पवित्र ग्रंथो को लिखे.
गरीबी पर धैर्य से मात करे. पुराने वस्त्रो को स्वच्छ रखे. बासी अन्न को गरम करे. अपनी कुरूपता पर अपने अच्छे व्यवहार से मात करे.
Chanakya Neeti Shastra – Daswa Adhyay

जिसके पास धन नहीं है वो गरीब नहीं है, वह तो असल में रहीस है, यदि उसके पास विद्या है. लेकिन जिसके पास विद्या नहीं है वह तो सब प्रकार से निर्धन है.

हम अपना हर कदम फूक फूक कर रखे. हम छाना हुआ जल पिए. हम वही बात बोले जो शास्त्र सम्मत है. हम वही काम करे जिसके बारे हम सावधानीपुर्वक सोच चुके है.
जिसे अपने इन्द्रियों की तुष्टि चाहिए, वह विद्या अर्जन करने के सभी विचार भूल जाए. और जिसे ज्ञान चाहिए वह अपने इन्द्रियों की तुष्टि भूल जाये. जो इन्द्रिय विषयों में लगा है उसे ज्ञान कैसा, और जिसे ज्ञान है वह व्यर्थ की इन्द्रिय तुष्टि में लगा रहे यह संभव नहीं.
वह क्या है जो कवी कल्पना में नहीं आ सकता. वह कौनसी बात है जिसे करने में औरत सक्षम नहीं है. ऐसी कौनसी बकवास है जो दारू पिया हुआ आदमी नहीं करता. ऐसा क्या है जो कौवा नहीं खाता.

नियति एक भिखारी को राजा और राजा को भिखारी बनाती है. वह एक अमीर आदमी को गरीब और गरीब को अमीर.

भिखारी यह कंजूस आदमी का दुश्मन है. एक अच्छा सलाहकार एक मुर्ख आदमी का शत्रु है.
वह पत्नी जो पर पुरुष में रूचि रखती है, उसके लिए उसका पति ही उसका शत्रु है.
जो चोर रात को काम करने निकलता है, चन्द्रमा ही उसका शत्रु है.
जिनके पास यह कुछ नहीं है…
विद्या.
तप.
ज्ञान.
अच्छा स्वभाव.
गुण.
दया भाव.
…वो धरती पर मनुष्य के रूप में घुमने वाले पशु है. धरती पर उनका भार है.

जिनके भेजे खाली है, वो कोई उपदेश नहीं समझते. यदि बास को मलय पर्वत पर उगाया जाये तो भी उसमे चन्दन के गुण नहीं आते.

जिसे अपनी कोई अकल नहीं उसकी शास्त्र क्या भलाई करेंगे. एक अँधा आदमी आयने का क्या करेगा.
एक बुरा आदमी सुधर नहीं सकता. आप पृष्ठ भाग को चाहे जितना साफ़ करे वो श्रेष्ठ भागो की बराबरी नहीं कर सकता.
अपने निकट संबंधियों का अपमान करने से जान जाती है.
दुसरो का अपमान करने से दौलत जाती है.
राजा का अपमान करने से सब कुछ जाता है.
एक ब्राह्मण का अपमान करने से कुल का नाश हो जाता है.
यह बेहतर है की आप जंगल में एक झाड के नीचे रहे, जहा बाघ और हाथी रहते है, उस जगह रहकर आप फल खाए और जलपान करे, आप घास पर सोये और पुराने पेड़ो की खाले पहने. लेकिन आप अपने सगे संबंधियों में ना रहे यदि आप निर्धन हो गए है.
ब्राह्मण एक वृक्ष के समान है. उसकी प्रार्थना ही उसका मूल है. वह जो वेदों का गान करता है वही उसकी शाखाए है. वह जो पुण्य कर्म करता है वही उसके पत्ते है. इसीलिए उसने अपने मूल को बचाना चाहिए. यदि मूल नष्ट हो जाता है तो शाखाये भी ना रहेगी और पत्ते भी.
लक्ष्मी मेरी माता है. विष्णु मेरे पिता है. वैष्णव जन मेरे सगे सम्बन्धी है. तीनो लोक मेरा देश है.
रात्रि के समय कितने ही प्रकार के पंछी वृक्ष पर विश्राम करते है. भोर होते ही सब पंछी दसो दिशाओ में उड़ जाते है. हम क्यों भला दुःख करे यदि हमारे अपने हमें छोड़कर चले गए.
जिसके पास में विद्या है वह शक्तिशाली है. निर्बुद्ध पुरुष के पास क्या शक्ति हो सकती है? एक छोटा खरगोश भी चतुराई से मदमस्त हाथी को तालाब में गिरा देता है.
हे विश्वम्भर तू सबका पालन करता है. मै मेरे गुजारे की क्यों चिंता करू जब मेरा मन तेरी महिमा गाने में लगा हुआ है. आपके अनुग्रह के बिना एक माता की छाती से दूध नहीं बह सकता और शिशु का पालन नहीं हो सकता. मै हरदम यही सोचता हुआ, हे यदु वंशियो के प्रभु, हे लक्ष्मी पति, मेरा पूरा समय आपकी ही चरण सेवा में खर्च करता हू.
Chanakya Neeti Shastra – Gyarwa Adhyay

उदारता, वचनों में मधुरता, साहस, आचरण में विवेक ये बाते कोई पा नहीं सकता ये मूल में होनी चाहिए.

जो अपने समाज को छोड़कर दुसरे समाज को जा मिलता है, वह उसी राजा की तरह नष्ट हो जाता है जो अधर्म के मार्ग पर चलता है.
हाथी का शरीर कितना विशाल है लेकिन एक छोटे से अंकुश से नियंत्रित हो जाता है.
एक दिया घने अन्धकार का नाश करता है, क्या अँधेरे से दिया बड़ा है.
एक कड़कती हुई बिजली एक पहाड़ को तोड़ देती है, क्या बिजली पहाड़ जितनी विशाल है.
जी नहीं. बिलकुल नहीं. वही बड़ा है जिसकी शक्ति छा जाती है. इससे कोई फरक नहीं पड़ता की आकार कितना है.
जो घर गृहस्थी के काम में लगा रहता है वह कभी ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता. मॉस खाने वाले के ह्रदय में दया नहीं हो सकती. लोभी व्यक्ति कभी सत्य भाषण नहीं कर सकता. और एक शिकारी में कभी शुद्धता नहीं हो सकती.
एक दुष्ट व्यक्ति में कभी पवित्रता उदीत नहीं हो सकती उसे चाहे जैसे समझा लो. नीम का वृक्ष कभी मीठा नहीं हो सकता आप चाहे उसकी शिखा से मूल तक घी और शक्कर छिड़क दे.
आप चाहे सौ बार पवित्र जल में स्नान करे, आप अपने मन का मैल नहीं धो सकते. उसी प्रकार जिस प्रकार मदिरा का पात्र पवित्र नहीं हो सकता चाहे आप उसे गरम करके सारी मदिरा की भाप बना दे.
इसमें कोई आश्चर्य नहीं की व्यक्ति उन बातो के प्रति अनुदगार कहता है जिसका उसे कोई ज्ञान नहीं. उसी प्रकार जैसे एक जंगली शिकारी की पत्नी हाथी के सर का मणि फेककर गूंजे की माला धारण करती है.
जो व्यक्ति एक साल तक भोजन करते समय भगवान् का ध्यान करेगा और मुह से कुछ नहीं बोलेगा उसे एक हजार करोड़ वर्ष तक स्वर्ग लोक की प्राप्ति होगी.
एक विद्यार्थी पूर्ण रूप से निम्न लिखित बातो का त्याग करे.
१. काम २. क्रोध ३. लोभ ४. स्वादिष्ट भोजन की अपेक्षा. ५. शरीर का शृंगार ६. अत्याधिक जिज्ञासा ७. अधिक निद्रा ८. शरीर निर्वाह के लिए अत्याधिक प्रयास.
वही सही में ब्राह्मण है जो केवल एक बार के भोजन से संतुष्ट रहे, जिस पर १६ संस्कार किये गए हो, जो अपनी पत्नी के साथ महीने में केवल एक दिन समागम करे. माहवारी समाप्त होने के दुसरे दिन.
वह ब्राह्मण जो दुकानदारी में लगा है, असल में वैश्य ही है.
निम्न स्तर के लोगो से जिस व्यवसाय में संपर्क आता है, वह व्यवसाय ब्राह्मण को शुद्र बना देता है.
वह ब्राह्मण जो दुसरो के काम में अड़ंगे डालता है, जो दम्भी है, स्वार्थी है, धोखेबाज है, दुसरो से घृणा करता है और बोलते समय मुह में मिठास और ह्रदय में क्रूरता रखता है, वह एक बिल्ली के समान है.
एक ब्राह्मण जो तालाब को, कुए को, टाके को, बगीचे को और मंदिर को नष्ट करता है, वह म्लेच्छ है.
वह ब्राह्मण जो भगवान् के मूर्ति की सम्पदा चुराता है और वह अध्यात्मिक गुरु जो दुसरे की पत्नी के साथ समागम करता है और जो अपना गुजारा करने के लिए कुछ भी और सब कुछ खाता है वह चांडाल है.
एक गुणवान व्यक्ति को वह सब कुछ दान में देना चाहिए जो उसकी आवश्यकता से अधिक है. केवल दान के कारण ही कर्ण, बाली और राजा विक्रमादित्य आज तक चल रहे है. देखिये उन मधु मख्खियों को जो अपने पैर दुखे से धारती पर पटक रही है. वो अपने आप से कहती है ” आखिर में सब चला ही गया. हमने हमारे शहद को जो बचा कर रखा था, ना ही दान दिया और ना ही खुद खाया. अभी एक पल में ही कोई हमसे सब छीन कर चला गया.”
Chanakya Neeti Shastra – Baarwa Adhyay

वह गृहस्थ भगवान् की कृपा को पा चुका है जिसके घर में आनंददायी वातावरण है. जिसके बच्चे गुणी है. जिसकी पत्नी मधुर वाणी बोलती है. जिसके पास अपनी जरूरते पूरा करने के लिए पर्याप्त धन है. जो अपनी पत्नी से सुखपूर्ण सम्बन्ध रखता है. जिसके नौकर उसका कहा मानते है. जिसके घर में मेहमान का स्वागत किया जाता है. जिसके घर में मंगल दायी भगवान की पूजा रोज की जाती है. जहा स्वाद भरा भोजन और पान किया जाता है. जिसे भगवान् के भक्तो की संगती में आनंद आता है.

जो एक संकट का सामना करने वाले ब्राह्मण को भक्ति भाव से अल्प दान देता है उसे बदले में विपुल लाभ होता है.
वे लोग जो इस दुनिया में सुखी है. जो अपने संबंधियों के प्रति उदार है. अनजाने लोगो के प्रति सह्रदय है. अच्छे लोगो के प्रति प्रेम भाव रखते है. नीच लोगो से धूर्तता पूर्ण व्यवहार करते है. विद्वानों से कुछ नहीं छुपाते. दुश्मनों के सामने साहस दिखाते है. बड़ो के प्रति विनम्र और पत्नी के प्रति सख्त है.
अरे लोमड़ी !!! उस व्यक्ति के शरीर को तुरंत छोड़ दे. जिसके हाथो ने कोई दान नहीं दिया. जिसके कानो ने कोई विद्या ग्रहण नहीं की. जिसके आँखों ने भगवान् का सच्चा भक्त नहीं देखा. जिसके पाँव कभी तीर्थ क्षेत्रो में नहीं गए. जिसने अधर्म के मार्ग से कमाए हुए धन से अपना पेट भरा. और जिसने बिना मतलब ही अपना सर ऊँचा उठा रखा है. अरे लोमड़ी !! उसे मत खा. नहीं तो तू दूषित हो जाएगी.
धिक्कार है उन्हें जिन्हें भगवान् श्री कृष्ण जो माँ यशोदा के लाडले है उन के चरण कमलो में कोई भक्ति नहीं. मृदंग की ध्वनि धिक् तम धिक् तम करके ऐसे लोगो का धिक्कार करती है.
बसंत ऋतू क्या करेगी यदि बास पर पत्ते नहीं आते. सूर्य का क्या दोष यदि उल्लू दिन में देख नहीं सकता. बादलो का क्या दोष यदि बारिश की बूंदे चातक पक्षी की चोच में नहीं गिरती. उसे कोई कैसे बदल सकता है जो किसी के मूल में है.
एक दुष्ट के मन में सद्गुणों का उदय हो सकता है यदि वह एक भक्त से सत्संग करता है. लेकिन दुष्ट का संग करने से भक्त दूषित नहीं होता. जमीन पर जो फूल गिरता है उससे धरती सुगन्धित होती है लेकिन पुष्प को धरती की गंध नहीं लगती.
उसका सही में कल्याण हो जाता है जिसे भक्त के दर्शन होते है. भक्त में तुरंत शुद्ध करने की क्षमता है. पवित्र क्षेत्र में तो लम्बे समय के संपर्क से शुद्धि होती है.
एक अजनबी ने एक ब्राह्मण से पूछा. “बताइए, इस शहर में महान क्या है?”. ब्राह्मण ने जवाब दिया की खजूर के पेड़ का समूह महान है.
अजनबी ने सवाल किया की यहाँ दानी कौन है? जवाब मिला के वह धोबी जो सुबह कपडे ले जाता है और शाम को लौटाता है.
प्रश्न हुआ यहाँ सबसे काबिल कौन है. जवाब मिला यहाँ हर कोई दुसरे का द्रव्य और दारा हरण करने में काबिल है.
प्रश्न हुआ की आप ऐसी जगह रह कैसे लेते हो? जवाब मिला की जैसे एक कीड़ा एक दुर्गन्ध युक्त जगह पर रहता है.
वह घर जहा ब्राह्मणों के चरण कमल को धोया नहीं जाता, जहा वैदिक मंत्रो का जोर से उच्चारण नहीं होता. और जहा भगवान् को और पितरो को भोग नहीं लगाया जाता वह घर एक स्मशान है.
सत्य मेरी माता है. अध्यात्मिक ज्ञान मेरा पिता है. धर्माचरण मेरा बंधू है. दया मेरा मित्र है. भीतर की शांति मेरी पत्नी है. क्षमा मेरा पुत्र है. मेरे परिवार में ये छह लोग है.
हमारे शारीर नश्वर है. धन में तो कोई स्थायी भाव नहीं है. म्रत्यु हरदम हमारे निकट है. इसीलिए हमें तुरंत पुण्य कर्म करने चाहिए.
ब्राह्मणों को स्वादिष्ट भोजन में आनंद आता है. गायो को ताज़ी कोमल घास खाने में. पत्नी को पति के सान्निध्य में. क्षत्रियो को युद्ध में आनंद आता है.
जो दुसरे के पत्नी को अपनी माता मानता है, दुसरे को धन को मिटटी का ढेला, दुसरे के सुख दुःख को अपने सुख दुःख. उसी को सही दृष्टी प्राप्त है और वही विद्वान है.
भगवान राम में ये सब गुण है. १. सद्गुणों में प्रीती. २. मीठे वचन ३. दान देने की तीव्र इच्छा शक्ति. ४. मित्रो के साथ कपट रहित व्यवहार. ५. गुरु की उपस्थिति में विनम्रता ६. मन की गहरी शान्ति. ६. शुद्ध आचरण ७. गुणों की परख ८. शास्त्र के ज्ञान की अनुभूति ८. रूप की सुन्दरता ९. भगवत भक्ति.
कल्प तरु तो एक लकड़ी ही है. सुवर्ण का सुमेर पर्वत तो निश्छल है. चिंता मणि तो एक पत्थर है. सूर्य में ताप है. चन्द्रमा तो घटता बढ़ता रहता है. अमर्याद समुद्र तो खारा है. काम देव का तो शरीर ही जल गया. महाराज बलि तो राक्षस कुल में पैदा हुए. कामधेनु तो पशु ही है. भगवान् राम के समान कौन है.
विद्या सफ़र में हमारा मित्र है. पत्नी घर पर मित्र है. औषधि रुग्ण व्यक्ति की मित्र है. मरते वक्त तो पुण्य कर्म ही मित्र है.
राज परिवारों से शिष्टाचार सीखे. पंडितो से बोलने की कला सीखे. जुआरियो से झूट बोलना सीखे. एक औरत से छल सीखे.
बिना सोचे समझे खर्च करने वाला, नटखट बच्चा जिसे अपना घर नहीं, झगड़े पर आमदा आदमी, अपनी पत्नी को दुर्लक्षित करने वाला, जो अपने आचरण पर ध्यान नहीं देता है. ये सब लोग जल्दी ही बर्बाद हो जायेंगे.
एक विद्वान व्यक्ति ने अपने भोजन की चिंता नहीं करनी चाहिए. उसे सिर्फ अपने धर्म को निभाने की चिंता होनी चाहिए. हर व्यक्ति का भोजन पर जन्म से ही अधिकार है.
जिसे दौलत, अनाज और विद्या अर्जित करने में और भोजन करने में शर्म नहीं आती वह सुखी रहता है.
बूंद बूंद से सागर बनता है. इसी तरह बूंद बूंद से ज्ञान, गुण और संपत्ति प्राप्त होते है.
जो व्यक्ति अपने बुढ़ापे में भी मुर्ख है वह सचमुच ही मुर्ख है. उसी प्रकार जिस प्रकार इन्द्र वरुण का फल कितना भी पके मीठा नहीं होता.
Chanakya Neeti Shastra – Terwa Adhyay

यदि आदमी एक पल के लिए भी जिए तो भी उस पल को वह शुभ कर्म करने में खर्च करे. एक कल्प तक जी कर कोई लाभ नहीं. दोनों लोक इस लोक और पर-लोक में तकलीफ होती है.

हम उसके लिए ना पछताए जो बीत गया. हम भविष्य की चिंता भी ना करे. विवेक बुद्धि रखने वाले लोग केवल वर्तमान में जीते है.
यह देवताओ का, संत जनों का और पालको का स्वभाव है की वे जल्दी प्रसन्न हो जाते है. निकट के और दूर के रिश्तेदार तब प्रसन्न होते है जब उनका आदर सम्मान किया जाए. उनके नहाने का, खाने पिने का प्रबंध किया जाए. पंडित जन जब उन्हें अध्यात्मिक सन्देश का मौका दिया जाता है तो प्रसन्न होते है.
जब बच्चा माँ के गर्भ में होता है तो यह पाच बाते तय हो जाती है…
१. कितनी लम्बी उम्र होगी. २. वह क्या करेगा ३. और ४. कितना धन और ज्ञान अर्जित करेगा. ५. मौत कब होगी.
देखिये क्या आश्चर्य है? बड़े लोग अनोखी बाते करते है. वे पैसे को तो तिनके की तरह मामूली समझते है लेकिन जब वे उसे प्राप्त करते है तो उसके भार से और विनम्र होकर झुक जाते है.
जो व्यक्ति अपने घर के लोगो से बहोत आसक्ति रखता है वह भय और दुःख को पाता है. आसक्ति ही दुःख का मूल है. जिसे सुखी होना है उसे आसक्ति छोडनी पड़ेगी.
जो भविष्य के लिए तैयार है और जो किसी भी परिस्थिति को चतुराई से निपटता है. ये दोनों व्यक्ति सुखी है. लेकिन जो आदमी सिर्फ नसीब के सहारे चलता है वह बर्बाद होता है.
यदि राजा पुण्यात्मा है तो प्रजा भी वैसी ही होती है. यदि राजा पापी है तो प्रजा भी पापी. यदि वह सामान्य है तो प्रजा सामान्य. प्रजा के सामने राजा का उद्हारण होता है. और वो उसका अनुसरण करती है.
मेरी नजरो में वह आदमी मृत है जो जीते जी धर्म का पालन नहीं करता. लेकिन जो धर्म पालन में अपने प्राण दे देता है वह मरने के बाद भी बेशक लम्बा जीता है.
जिस व्यक्ति ने न ही कोई ज्ञान संपादन किया, ना ही पैसा कमाया, मुक्ति के लिए जो आवश्यक है उसकी पूर्ति भी नहीं किया. वह एक निहायत बेकार जिंदगी जीता है जैसे के बकरी की गर्दन से झूलने वाले स्तन.
जो नीच लोग होते है वो दुसरे की कीर्ति को देखकर जलते है. वो दुसरे के बारे में अपशब्द कहते है क्यों की उनकी कुछ करने की औकात नहीं है.
यदि विषय बहुत प्रिय है तो वो बंधन में डालते है. विषय सुख की अनासक्ति से मुक्ति की और गति होती है. इसीलिए मुक्ति या बंधन का मूल मन ही है.
जो आत्म स्वरुप का बोध होने से खुद को शारीर नहीं मानता, वह हरदम समाधी में ही रहता है भले ही उसका शरीर कही भी चला जाए.
किस को सब सुख प्राप्त हुए जिसकी कामना की. सब कुछ भगवान् के हाथ में है. इसलिए हमें संतोष में जीना होगा.
जिस प्रकार एक गाय का बछड़ा, हजारो गायो में अपनी माँ के पीछे चलता है उसी तरह कर्म आदमी के पीछे चलते है.
जिस के काम करने में कोई व्यवस्था नहीं, उसे कोई सुख नहीं मिल सकता. लोगो के बीच या वन में. लोगो के मिलने से उसका ह्रदय जलता है और वन में तो कोई सुविधा होती ही नहीं.
यदि आदमी उपकरण का सहारा ले तो गर्भजल से पानी निकाल सकता है. उसी तरह यदि विद्यार्थी अपने गुरु की सेवा करे तो गुरु के पास जो ज्ञान निधि है उसे प्राप्त करता है.
हमें अपने कर्म का फल मिलता है. हमारी बुद्धि पर इसके पहले हमने जो कर्म किये है उसका निशान है. इसीलिए जो बुद्धिमान लोग है वो सोच विचार कर कर्म करते है.
जिस व्यक्ति ने आपको अध्यात्मिक महत्ता का एक अक्षर भी पढाया उसकी पूजा करनी चाहिए. जो ऐसे गुरु का सम्मान नहीं करता वह सौ बार कुत्ते का जन्म लेता है. और आखिर चंडाल बनता है. चांडाल वह है जो कुत्ता खाता है.
जब युग का अंत हो जायेगा तो मेरु पर्वत डिग जाएगा. जब कल्प का अंत होगा तो सातों समुद्र का पानी विचलित हो जायगा. लेकिन साधू कभी भी अपने अध्यात्मिक मार्ग से नहीं डिगेगा.
इस धरती पर अन्न, जल और मीठे वचन ये असली रत्न है. मूर्खो को लगता है पत्थर के टुकड़े रत्न है.
Choudwa Adhyay

गरीबी, दुःख और एक बंदी का जीवन यह सब व्यक्ति के किए हुए पापो का ही फल है.

आप दौलत, मित्र, पत्नी और राज्य गवाकर वापस पा सकते है लेकिन यदि आप अपनी काया गवा देते है तो वापस नहीं मिलेगी.
यदि हम बड़ी संख्या में एकत्र हो जाए तो दुश्मन को हरा सकते है. उसी प्रकार जैसे घास के तिनके एक दुसरे के साथ रहने के कारण भारी बारिश में भी क्षय नहीं होते.
पानी पर तेल, एक कमीने आदमी को बताया हुआ राज, एक लायक व्यक्ति को दिया हुआ दान और एक बुद्धिमान व्यक्ति को पढाया हुआ शास्त्रों का ज्ञान अपने स्वभाव के कारण तेजी से फैलते है.
वह व्यक्ति क्यों मुक्ति को नहीं पायेगा जो निम्न लिखित परिस्थितियों में जो उसके मन की अवस्था होती है उसे कायम रखता है…
जब वह धर्म के अनुदेश को सुनता है.
जब वह स्मशान घाट में होता है.
जब वह बीमार होता है.
वह व्यक्ति क्यों पूर्णता नहीं हासिल करेगा जो पश्चाताप में जो मन की अवस्था होती है, उसी अवस्था को काम करते वक़्त बनाए रखेंगा.
हमें अभिमान नहीं होना चाहिए जब हम ये बाते करते है..
१. परोपकार २. आत्म संयम ३. पराक्रम ४. शास्त्र का ज्ञान हासिल करना. ५. विनम्रता ६. नीतिमत्ता
यह करते वक़्त अभिमान करने की इसलिए जरुरत नहीं क्यों की दुनिया बहुत कम दिखाई देने वाले दुर्लभ रत्नों से भरी पड़ी है.
वह जो हमारे मन में रहता हमारे निकट है. हो सकता है की वास्तव में वह हमसे बहुत दूर हो. लेकिन वह व्यक्ति जो हमारे निकट है लेकिन हमारे मन में नहीं है वह हमसे बहोत दूर है.
यदि हम किसीसे कुछ पाना चाहते है तो उससे ऐसे शब्द बोले जिससे वह प्रसन्न हो जाए. उसी प्रकार जैसे एक शिकारी मधुर गीत गाता है जब वह हिरन पर बाण चलाना चाहता है.
जो व्यक्ति राजा से, अग्नि से, धर्म गुरु से और स्त्री से बहुत परिचय बढ़ाता है वह विनाश को प्राप्त होता है. जो व्यक्ति इनसे पूर्ण रूप से अलिप्त रहता है, उसे अपना भला करने का कोई अवसर नहीं मिलता. इसलिए इनसे सुरक्षित अंतर रखकर सम्बन्ध रखना चाहिए.
हम इनके साथ बहुत सावधानी से पेश आये..
१. अग्नि २. पानी ३. औरत ४. मुर्ख ५. साप ६. राज परिवार के सदस्य.
जब जब हम इनके संपर्क में आते है.
क्योकि ये हमें एक झटके में मौत तक पंहुचा सकते है.
वही व्यक्ति जीवित है जो गुणवान है और पुण्यवान है. लेकिन जिसके पास धर्म और गुण नहीं उसे क्या शुभ कामना दी जा सकती है.
यदि आप दुनिया को एक काम करके जितना चाहते हो तो इन पंधरा को अपने काबू में रखो. इन्हें इधर उधर ना भागने दे.
पांच इन्द्रियों के विषय १. जो दिखाई देता है २. जो सुनाई देता है ३. जिसकी गंध आती है ४. जिसका स्वाद आता है. ५. जिसका स्पर्श होता है.
पांच इन्द्रिय १. आँख २. कान ३. नाक ४. जिव्हा ५. त्वचा
पांच कर्मेन्द्रिय १. हाथ २. पाँव ३. मुह ४. जननेंद्रिय ५. गुदा
वही पंडित है जो वही बात बोलता है जो प्रसंग के अनुरूप हो. जो अपनी शक्ति के अनुरूप दुसरो की प्रेम से सेवा करता है. जिसे अपने क्रोध की मर्यादा का पता है.
एक ही वस्तु देखने वालो की योग्यता के अनुरूप बिलग बिलग दिखती है. तप करने वाले में वस्तु को देखकर कोई कामना नहीं जागती. लम्पट आदमी को हर वास्तु में स्त्री दिखती है. कुत्ते को हर वस्तु में मांस दिखता है.
जो व्यक्ति बुद्धिमान है वह निम्न लिखित बाते किसी को ना बताये…
वह औषधि उसने कैसे बनायीं जो अच्छा काम कर रही है.
वह परोपकार जो उसने किया.
उसके घर के झगडे.
उसकी उसके पत्नी के साथ होने वाली व्यक्तिगत बाते.
उसने जो ठीक से न पका हुआ खाना खाया.
जो गालिया उसने सुनी.
कोकिल तब तक मौन रहते है. जबतक वो मीठा गाने की क़ाबलियत हासिल नहीं कर लेते और सबको आनंद नहीं पंहुचा सकते.
हम निम्न लिखित बाते प्राप्त करे और उसे कायम रखे.
हमें पुण्य कर्म के जो आशीर्वाद मिले.
धन, अनाज, वो शब्द जो हमने हमारे अध्यात्मिक गुरु से सुने.
कम पायी जाने वाली दवाइया.
हम ऐसा नहीं करते है तो जीना मुश्किल हो जाएगा.
कुसंग का त्याग करे और संत जानो से मेलजोल बढाए. दिन और रात गुणों का संपादन करे. उसपर हमेशा चिंतन करे जो शाश्वत है और जो अनित्य है उसे भूल जाए.
Pandhrawa Adhyay

वह व्यक्ति जिसका ह्रदय हर प्राणी मात्र के प्रति करुणा से पिघलता है. उसे जरुरत क्या है किसी ज्ञान की, मुक्ति की, सर के ऊपर जटाजूट रखने की और अपने शारीर पर राख मलने की.

इस दुनिया में वह खजाना नहीं है जो आपको आपके सदगुरु ने ज्ञान का एक अक्षर दिया उसके कर्जे से मुक्त कर सके.
काटो से और दुष्ट लोगो से बचने के दो उपाय है. पैर में जुते पहनो और उन्हें इतना शर्मसार करो की वो अपना सर उठा ना सके और आपसे दूर रहे.
जो अस्वच्छ कपडे पहनता है. जिसके दात साफ़ नहीं. जो बहोत खाता है. जो कठोर शब्द बोलता है. जो सूर्योदय के बाद उठता है. उसका कितना भी बड़ा व्यक्तित्व क्यों न हो, वह लक्ष्मी की कृपा से वंचित रह जायेगा.
जब व्यक्ति दौलत खोता है तो उसके मित्र, पत्नी, नौकर, सम्बन्धी उसे छोड़कर चले जाते है. और जब वह दौलत वापस हासिल करता है तो ये सब लौट आते है. इसीलिए दौलत ही सबसे अच्छा रिश्तेदार है.
पाप से कमाया हुआ पैसा दस साल रह सकता है. ग्यारवे साल में वह लुप्त हो जाता है, उसकी मुद्दल के साथ.
एक महान आदमी जब कोई गलत काम करता है तो उसे कोई कुछ नहीं कहता. एक नीच आदमी जब कोई अच्छा काम भी करता है तो उसका धिक्कार होता है. देखिये अमृत पीना तो अच्छा है लेकिन राहू की मौत अमृत पिने से ही हुई. विष पीना नुकसानदायी है लेकिन भगवान् शंकर ने जब विष प्राशन किया तो विष उनके गले का अलंकार हो गया.
एक सच्चा भोजन वह है जो ब्राह्मण को देने के बाद शेष है. प्रेम वह सत्य है जो दुसरो को दिया जाता है. खुद से जो प्रेम होता है वह नहीं. वही बुद्धिमत्ता है जो पाप करने से रोकती है. वही दान है जो बिना दिखावे के किया जाता है.
यदि आदमी को परख नहीं है तो वह अनमोल रत्नों को तो पैर की धुल में पडा हुआ रखता है और घास को सर पर धारण करता है. ऐसा करने से रत्नों का मूल्य कम नहीं होता और घास के तिनको की महत्ता नहीं बढती. जब विवेक बुद्धि वाला आदमी आता है तो हर चीज को उसकी जगह दिखाता है.
शास्त्रों का ज्ञान अगाध है. वो कलाए अनंत जो हमें सीखनी छाहिये. हमारे पास समय थोडा है. जो सिखने के मौके है उसमे अनेक विघ्न आते है. इसीलिए वही सीखे जो अत्यंत महत्वपूर्ण है. उसी प्रकार जैसे हंस पानी छोड़कर उसमे मिला हुआ दूध पी लेता है.
वह आदमी चंडाल है जो एक दूर से अचानक आये हुए थके मांदे अतिथि को आदर सत्कार दिए बिना रात्रि का भोजन खुद खाता है.
एक व्यक्ति को चारो वेद और सभी धर्मं शास्त्रों का ज्ञान है. लेकिन उसे यदि अपने आत्मा की अनुभूति नहीं हुई तो वह उसी चमचे के समान है जिसने अनेक पकवानों को हिलाया लेकिन किसी का स्वाद नहीं चखा.
वह लोग धन्य है, ऊँचे उठे हुए है जिन्होंने संसार समुद्र को पार करते हुए एक सच्चे ब्राह्मण की शरण ली. उनकी शरणागति ने नौका का काम किया. वे ऐसे मुसाफिरों की तरह नहीं है जो ऐसे सामान्य जहाज पर सवार है जिसके डूबने का खतरा है.
चन्द्रमा जो अमृत से लबालब है और जो औषधियों की देवता माना जाता है, जो अमृत के समान अमर और दैदीप्यमान है. उसका क्या हश्र होता है जब वह सूर्य के घर जाता है अर्थात दिन में दिखाई देता है. तो क्या एक सामान्य आदमी दुसरे के घर जाकर लघुता को नहीं प्राप्त होगा.
यह मधु मक्खी जो कमल की नाजुक पंखडियो में बैठकर उसके मीठे मधु का पान करती थी, वह अब एक सामान्य कुटज के फूल पर अपना ताव मारती है. क्यों की वह ऐसे देश में आ गयी है जहा कमल है ही नहीं, उसे कुटज के पराग ही अच्छे लगते है.
हे भगवान् विष्णु, मेरे स्वामी, मै ब्राह्मणों के घर में इस लिए नहीं रहती क्यों की…..
अगस्त्य ऋषि ने गुस्से में समुद्र को ( जो मेरे पिता है) पी लिया.
भृगु मुनि ने आपकी छाती पर लात मारी.
ब्राह्मणों को पढने में बहोत आनंद आता है और वे मेरी जो स्पर्धक है उस सरस्वती की हरदम कृपा चाहते है.
और वे रोज कमल के फूल को जो मेरा निवास है जलाशय से निकलते है और भगवान् शिव की पूजा करते है.
दुनिया में बाँधने के ऐसे अनेक तरीके है जिससे व्यक्ति को प्रभाव में लाया जा सकता है और नियंत्रित किया जा सकता है. सबसे मजबूत बंधन प्रेम का है. इसका उदाहरण वह मधु मक्खी है जो लकड़ी को छेड़ सकती है लेकिन फूल की पंखुडियो को छेदना पसंद नहीं करती चाहे उसकी जान चली जाए.
चन्दन कट जाने पर भी अपनी महक नहीं छोड़ते. हाथी बुढा होने पर भी अपनी लीला नहीं छोड़ता. गन्ना निचोड़े जाने पर भी अपनी मिठास नहीं छोड़ता. उसी प्रकार ऊँचे कुल में पैदा हुआ व्यक्ति अपने उन्नत गुणों को नहीं छोड़ता भले ही उसे कितनी भी गरीबी में क्यों ना बसर करना पड़े.
Solhwa Adhyay
स्त्री (यहाँ लम्पट स्त्री या पुरुष अभिप्रेत है) का ह्रदय पूर्ण नहीं है वह बटा हुआ है. जब वह एक आदमी से बात करती है तो दुसरे की ओर वासना से देखती है और मन में तीसरे को चाहती है.
मुर्ख को लगता है की वह हसीन लड़की उसे प्यार करती है. वह उसका गुलाम बन जाता है और उसके इशारो पर नाचता है.
ऐसा यहाँ कौन है जिसमे दौलत पाने के बाद मस्ती नहीं आई. क्या कोई बेलगाम आदमी अपने संकटों पर रोक लगा पाया. इस दुनिया में किस आदमी को औरत ने कब्जे में नहीं किया. किस के ऊपर राजा की हरदम मेहेरबानी रही. किसके ऊपर समय के प्रकोप नहीं हुए. किस भिखारी को यहाँ शोहरत मिली. किस आदमी ने दुष्ट के दुर्गुण पाकर सुख को प्राप्त किया.
व्यक्ति को महत्ता उसके गुण प्रदान करते है वह जिन पदों पर काम करता है सिर्फ उससे कुछ नहीं होता. क्या आप एक कौवे को गरुड़ कहेंगे यदि वह एक ऊँची ईमारत के छत पर जाकर बैठता है.
जो व्यक्ति गुणों से रहित है लेकिन जिसकी लोग सराहना करते है वह दुनिया में काबिल माना जा सकता है. लेकिन जो आदमी खुद की ही डींगे हाकता है वो अपने आप को दुसरे की नजरो में गिराता है भले ही वह स्वर्ग का राजा इंद्र हो.
यदि एक विवेक संपन्न व्यक्ति अच्छे गुणों का परिचय देता है तो उसके गुणों की आभा को रत्न जैसी मान्यता मिलती है. एक ऐसा रत्न जो प्रज्वलित है और सोने के अलंकर में मढने पर और चमकता है.
वह व्यक्ति जो सर्व गुण संपन्न है अपने आप को सिद्ध नहीं कर सकता है जबतक उसे समुचित संरक्षण नहीं मिल जाता. उसी प्रकार जैसे एक मणि तब तक नहीं निखरता जब तक उसे आभूषण में सजाया ना जाए.
मुझे वह दौलत नहीं चाहिए जिसके लिए कठोर यातना सहनी पड़े, या सदाचार का त्याग करना पड़े या अपने शत्रु की चापलूसी करनी पड़े.
जो अपनी दौलत, पकवान और औरते भोगकर संतुष्ट नहीं हुए ऐसे बहोत लोग पहले मर चुके है. अभी भी मर रहे है और भविष्य में भी मरेंगे.
सभी परोपकार और तप तात्कालिक लाभ देते है. लेकिन सुपात्र को जो दान दिया जाता है और सभी जीवो को जो संरक्षण प्रदान किया जाता है उसका पुण्य कभी नष्ट नहीं होता.
घास का तिनका हल्का है. कपास उससे भी हल्का है. भिखारी तो अनंत गुना हल्का है. फिर हवा का झोका उसे उड़ाके क्यों नहीं ले जाता. क्योकि वह डरता है कही वह भीख न मांग ले.
बेइज्जत होकर जीने से अच्छा है की मर जाए. मरने में एक क्षण का दुःख होता है पर बेइज्जत होकर जीने में हर रोज दुःख उठाना पड़ता है.
सभी जीव मीठे वचनों से आनंदित होते है. इसीलिए हम सबसे मीठे वचन कहे. मीठे वचन की कोई कमी नहीं है.
इस दुनिया के वृक्ष को दो मीठे फल लगे है. मधुर वचन और सत्संग.
पहले के जन्मो की अच्छी आदते जैसे दान, विद्यार्जन और तप इस जनम में भी चलती रहती है. क्योकि सभी जनम एक श्रुंखला से जुड़े है.
जिसका ज्ञान किताबो में सिमट गया है और जिसने अपनी दौलत दुसरो के सुपुर्द कर दी है वह जरुरत आने पर ज्ञान या दौलत कुछ भी इस्तमाल नहीं कर सकता.
Satarahwa Adhyay

वह विद्वान जिसने असंख्य किताबो का अध्ययन बिना सदगुरु के आशीर्वाद से कर लिया वह विद्वानों की सभा में एक सच्चे विद्वान के रूप में नहीं चमकता है. उसी प्रकार जिस प्रकार एक नाजायज औलाद को दुनिया में कोई प्रतिष्ठा हासिल नहीं होती.

हमें दुसरो से जो मदद प्राप्त हुई है उसे हमें लौटना चाहिए. उसी प्रकार यदि किसीने हमसे यदि दुष्टता की है तो हमें भी उससे दुष्टता करनी चाहिए. ऐसा करने में कोई पाप नहीं है.
वह चीज जो दूर दिखाई देती है, जो असंभव दिखाई देती है, जो हमारी पहुच से बहार दिखाई देती है, वह भी आसानी से हासिल हो सकती है यदि हम तप करते है. क्यों की तप से ऊपर कुछ नहीं.
लोभ से बड़ा दुर्गुण क्या हो सकता है. पर निंदा से बड़ा पाप क्या है. जो सत्य में प्रस्थापित है उसे तप करने की क्या जरूरत है. जिसका ह्रदय शुद्ध है उसे तीर्थ यात्रा की क्या जरूरत है. यदि स्वभाव अच्छा है तो और किस गुण की जरूरत है. यदि कीर्ति है तो अलंकार की क्या जरुरत है. यदि व्यवहार ज्ञान है तो दौलत की क्या जरुरत है. और यदि अपमान हुआ है तो मृत्यु से भयंकर नहीं है क्या.
समुद्र ही सभी रत्नों का भण्डार है. वह शंख का पिता है. देवी लक्ष्मी शंख की बहन है. लेकिन दर दर पर भीख मांगने वाले हाथ में शंख ले कर घूमते है. इससे यह बात सिद्ध होती है की उसी को मिलेगा जिसने पहले दिया है.
जब आदमी में शक्ति नहीं रह जाती वह साधू हो जाता है. जिसके पास दौलत नहीं होती वह ब्रह्मचारी बन जाता है. रुग्ण भगवान् का भक्त हो जाता है. जब औरत बूढी होती है तो पति के प्रति समर्पित हो जाती है.
साप के दंश में विष होता है. कीड़े के मुह में विष होता है. बिच्छू के डंख में विष होता है. लेकिन दुष्ट व्यक्ति तो पूर्ण रूप से विष से भरा होता है.
जो स्त्री अपने पति की सम्मति के बिना व्रत रखती है और उपवास करती है, वह उसकी आयु घटाती है और खुद नरक में जाती है.
स्त्री दान दे कर, उपवास रख कर और पवित्र जल का पान करके पावन नहीं हो सकती. वह पति के चरणों को धोने से और ऐसे जल का पान करने से शुद्ध होती है.
एक हाथ की शोभा गहनों से नहीं दान देने से है. चन्दन का लेप लगाने से नहीं जल से नहाने से निर्मलता आती है. एक व्यक्ति भोजन खिलाने से नहीं सम्मान देने से संतुष्ट होता है. मुक्ति खुद को सजाने से नहीं होती, अध्यात्मिक ज्ञान को जगाने से होती है.
टुंडी फल खाने से आदमी की समझ खो जाती है. वच मूल खिलाने से लौट आती है. औरत के कारण आदमी की शक्ति खो जाती है, दूध से वापस आती है.
जिसमे सभी जीवो के प्रति परोपकार की भावना है वह सभी संकटों पर मात करता है और उसे हर कदम पर सभी प्रकार की सम्पन्नता प्राप्त होती है.
वह इंद्र के राज्य में जाकर क्या सुख भोगेगा….
जिसकी पत्नी प्रेमभाव रखने वाली और सदाचारी है.
जिसके पास में संपत्ति है.
जिसका पुत्र सदाचारी और अच्छे गुण वाला है.
जिसको अपने पुत्र द्वारा पौत्र हुए है.
मनुष्यों में और निम्न स्तर के प्राणियों में खाना, सोना, घबराना और गमन करना समान है. मनुष्य अन्य प्राणियों से श्रेष्ठ है तो विवेक ज्ञान की बदौलत. इसलिए जिन मनुष्यों में ज्ञान नहीं है वे पशु है.
यदि मद मस्त हाथी अपने माथे से टपकने वाले रस को पीने वाले भौरों को कान हिलाकर उड़ा देता है, तो भौरों का कुछ नहीं जाता, वे कमल से भरे हुए तालाब की ओर ख़ुशी से चले जाते है. हाथी के माथे का शृंगार कम हो जाता है.
ये आठो कभी दुसरो का दुःख नहीं समझ सकते …
१. राजा २. वेश्या ३. यमराज ४. अग्नि ५. चोर ६. छोटा बच्चा ७. भिखारी और ८. कर वसूल करने वाला.
हे महिला, तुम निचे झुककर क्या देख रही हो? क्या तुम्हारा कुछ जमीन पर गिर गया है?
हे मुर्ख, मेरे तारुण्य का मोती न जाने कहा फिसल गया.
हे केतकी पुष्प! तुममे तो कीड़े रहते है. तुमसे ऐसा कोई फल भी नहीं बनता जो खाया जाय. तुम्हारे पत्ते काटो से ढके है. तुम टेढ़े होकर बढ़ते हो. कीचड़ में खिलते हो. कोई तुम्हे आसानी से पा नहीं सकता. लेकिन तुम्हारी अतुलनीय खुशबु के कारण दुसरे पुष्पों की तरह सभी को प्रिय हो. इसीलिए एक ही अच्छाई अनेक बुराइयों पर भारी पड़ती है.

Rahim Ke Dohe

Jehi Rahim Man Aapno Kinho Charu Chakor |
Nisi-Basar Lagyo Rahe, Krishnachandra Ki Ore ||

The chakor bird always takes delight in looking at the moon, disregarding everything else. We should make our mind a chakor bird and should see the divine pervading through the whole world.

Rahiman Kou Ka Karai, Jwari Chor Labar |
Jo Pat Rakhan Har Hai, Makhan Chankhan Har ||

Those who have taken shetler at the all pervading consciousness need not worry about petty theives and decietful people.

Rahiman Gali Hai Sakri, Dujo Nahi Thaharahi |
Apu Ahai, To Hari Nahi, Hari To Aapun Nahi ||

The lane is very narrow. There is space for only one. Either ego or God will be accomodated.

Amarbeli Binu Mul Ki, Pratipalat Hai Tahi |
Rahiman Aise Prabhuhi Taji, Khojat Firie Kahi ||

The creeper of amarbeli doesn’t have any root, it is nourished by God. Why you are searching your roots when God is there to take care.

Jaal Pare Jal Jaat Bahi, Taji Minan Ko Moh |
Rahiman Machri Neer Ko Tau Na Chadti Chhoh ||

A fish is caught in a net and taken away from water. Water lets the fish go. Look at the love that the fish has for water, the fish prefers death to separation.

Dhani Rahim Gati Meen Ki, Jal Bichhurat Jiy Jaay |
Jiyat Kanj Taji Anat Basi, Kaha Bhour Ko Bhay ||

What a great attachment the fish has to water. If water is not there the fish dies. And look at the bee it flies away from the flower while alive.

Pritam Chhabi Nainan Basi, Par-chhabi kaha samaay |
Bhari Saray Rahim Lakhi, Pathik Aap Phir Jaay ||

When true love fills the eyes, there is no scope there for anything else. Everything else backtracks as there is no scope for any accomodation.

Rahiman Paida Prem Ko, Nipat Silsili Gail |
Bilchhat Paav Pipiliko, Log Ladawat Bail ||

The path of love is very slippery. Even an ant slips walking path of love and people think that they will travel the path of love by riding a bullock. The path of love can be treaded by those who make their mind understand very subtle things. If one uses gross means for attainig love, one is bound to fail.

Rahiman Dhaga Prem Ka, Mat Todo Chatkay |
Tute Se Phir Naa Mile, Mile Gaanth Pad Jaaye ||

Please don’t break the string of love by applying jerks. If it breaks it can’t be tied, if tied there will be a knot.

Rahiman Priti Sarahiye, Mile Hot Rang Doon |
Jyon Jardi Hardi Tajai, Tajai Safedi Choon ||

Rahim appreciates that love where lovers lose their identities and create a new identity. If turmeric and lime are mixed both lose their colors and a new color is produced.

Kaha Karau Vaikunth Lai, Kalpabruchh Ki Chhah |
Rahiman Dhaak Suhawano, Jo Gal Pritam Baah ||

There is no point in going to vaikuntha and sitting there under a wish-yielding tree. It is better to sit under an ordinary tree with someone who loves you.

Je Sulge Te Bujh Gaye, Bujhe Te Sulge Nahi |
Rahiman Dahe Prem Ke, Bujhi-bujhikai Sulgahi ||

If a wood catches fire it extinguishes after reducing to ash. But those who burn in love never extinguish and burn forever.

Tute Sujan Manaie, Jo Tute Sou Baar |
Rahiman Phir Phir Poie, Tute Muktahar ||

One who is dear to you should be got back in the stride of love even if he goes away 100 times. Won’t you make a neck-lace of pearls again should it break?

Yaha Na Rahim Sarahie, Den-len Ki Priti |
Pranan Baaji Rakhiye, Haar Hoye Kai Jeet ||

Who will appreciate a love based on underlying deal. Whether love is a commodity that can be traded.

Rahiman Mein-Turang Chadhi, Chalibo Pawak Mahi |
Prem-Panth Aiso Kathin, Sab Kou Nibahat Nahi ||

Not everyone can walk the path of love. It is very difficult. It is like a horse made of wax passing through fire.

Waha Preet Nahi Reeti Waha, Nahi Pachhilo Het |
Ghatat-Ghatat Rahiman Ghatai, Jyo Kar Leenhe Ret ||

Is it a love that diminishes in the course of time. No it is not love. It is not a sand that sieves down after putting on palm.

Gahi Sarnagati Ram Ki, Bhavsagar Ki Naav |
Rahiman Jagat-Udhar Ko, Aur Na Kachhu Upay ||

The unconditional surrender to Shri Ram (the all pervading consciousness) is the boat that will sail you through the ocean of transmigration. There is no other means for attaining salvation.

Muni-Naari Pashan Hi, Kapi, Pashu, Guh Matang |
Teeno Tare Ramju, Teeno Mere Ang ||

Shri Ram granted salvation to Ahilya who attained a form of rock. He granted salvation to monkeys and beasts. He also granted salvation to Nishad who was born in a low breed.
All there three are part of me.
My heart is as hard as a rock.
The passions and tendencies of my mind are like beasts.
I am a person of mean actions.
So I am looking forward to Shri Ram and hope that he grants me salvation.

Raam Naam Janyo Nahi, Bhai Pooja Me Hani |
Kahi Rahim Kyon Manihai, Jam Ke Kikar Kani ||

I didn’t understand the glory of the name of Rama and did all the rituals. The things turned worse. On the day of reckoning I will not be pardoned and will be put to shame.

Mathat-Mathat Makhan Rahe, Dahi Mahi Bilgaay |
Rahiman Soi Meet Hai, Bheer Pare Thahraay ||

A friend in need is a friend indeed. A friend who keeps away during turbulence is of no use. If curd is stirred continuously butter remains with curd and butter milk parts it’s way.

Jihi Rahim Tan Man Liyo, Kiyo Hie Bich Bhoun |
Taso Dukh-Sukh Kahan Ki, Rahi Baat Ab Kaun ||

My dear friend has occupied my mind and body and has taken posession of my heart. Now, where is the need to tell him about the ups and downs I am passing through in my life.

Je Garib So Hit Kare, Dhani Rahim Te Log |
Kaha Sudama Bapuro, Krushna-Mitai-Jog ||

Those who do good to the deprived people are rich. Shri Krishna is rich because he did good to Sudama who had no standing to be a friend of King of Dwarka.

Jo Rahim Karbou Huto, Braj Ko Ihai Hawal |
To Kahe Kar Par Dharyo, Gowardhan Gopal ||

O God Gopal if you were all set to desert Braj, why did you lift the Gowardhan Mount on your finger to protect Braj.

Hari Rahim Aisi Kari, Jyon Kamaan Sar Pur |
Khenchi Aapni Ore Ko, Daari Diyo Puni Dur ||

An arrow on the bow first moves towards the bow and then it shoots fay away. Something like this has happened to me, I moved near God and then moved far away.

Rahiman Keenhee Preeti, Saahab Ko Bhaavai Nahi |
Jinke Aganit Meet, Hame Gareeban Ko Ganai ||

I loved Lord but it seems that the Lord didn’t like it. I am a poor servant and He is served by innumerable devotees.

Bindu Me Sindhu Samaan, Ko Achraj Kaaso Kahe |
Heranhar Hiran, Rahiman Aapuni Aapme ||

It is a great wonder, to whom should I say. The whole ocean has immersed in a drop. The thing that was being searched has been lost.

Rahiman Baat Agamya Ki, Kahani-Sunani Ki Nahi |
Je Janat Te Kahat Nahi, Kahat Te Jaanat Naahi ||

I am talking about something which can’t be understood. There is no point in telling and listening about it. Those who have experienced that truth won’t say anything. Those who are talking about it know nothing.

Sada Nagara Kuch Ka, Bajat Aatho Jaam |
Rahiman Ya Jag Aikei, Ko Kari Raha Mukaam ||

The drums are beating at all times. They announce that one has to die. Everyone has to go one day or other, no one is here forever.

Souda Karau So Kahi Chalo, Rahiman Yaahi Ghaat |
Fir Souda Paihi Nahi, Doori Jaat Hai Baat ||

Please do all deals that you want to do here in the marketplace. There won’t be any opportunity afterwards. Then there is a long path that you will have to walk.

Rahiman Kathin Chitaan Tai, Chita Ko Chit Chait |
Chita Dahati Nirjeev Ko, Chinta Jeev-Samet ||

Worry is worse than pyre. A pyre burns a dead body, while a person who worries burns a body that has life. So please wake up and stop worrying.

Kagaj Ko So Pootra, Sahajhi Me Ghul Jaay |
Rahiman Yah Achraj Lakho, Sou Khechat Jaay ||

A body can be thrown away by wind and it’s existence can be ended. But look at the wonder, it is inhaling air continuously.

Tai Rahim Ab Koun Hai, Ato Khechat Baay |
Jas Kagad Ka Pootra, Nami Maahi Ghul Jaay ||

This body is like something made of paper. It should dissolve on becoming wet. It is beyond comprehension who is inhaling air inside the body.

Rahiman Thuthri Dhoori Ki, Rahi Pawan Te Poori |
Gaanthi Jugti Ki Khul Gai, Rahi Dhoori Ki Dhoori ||

What is this body, it is a bagful dust. If the knot is opened one can see it is just dust.

Rahiman Waha Na Jaiye, Jaha Kapat Ko Het |
Ham To Dharat Dhekuli, Seenchat Apno Khet ||

Rahim doesn’t stay with very cunning people. In case he does that he does all the work and these deceitful people enjoy fruits of his work.

Sab Kou Sabso Kare, Ram Juhar Salam |
Hit Anhit Tab Jaaniye, Jaa Din Atke Kaam ||

When people meet each other they say hi, hello, how are you. One comes to know about his friends and foes when he approaches them in need.

Khira Ko Sir KatiKai, Maliyat Loun Lagay |
Rahiman Kuruwe Mukhan Ki, Chahie Yahi Sajay ||

A cucumber is bitter at its end. So people cut it’s top and apply salt. People also do the same with those who have bitter head (mouth). Those, who are bitter unnecessarily, lose their heads and people apply salt on their wounds.

Jo Rahim Ochho Badhe, To Ati Hee Itraay |
Pyade Se Pharji Bhayo, Tedho-Tedho Jaay ||

Those who belong to low level can’t digest any success. They become crooked if they happen to get some respect.

Rahiman Neechan Sang Basi, Lagat Kalank Na Kaahi |
Doodh Kalaarin Haath Lakhi, Sab Samujhi Mad Taahi ||

Who has not been blemished for being in the company of bad. If a person selling liquor sells milk, people think that liquor is being sold.

Oun Badaee Jaldhi Mili, Gang Naam Bho Dheem |
Kehi Kee Prabhuta Nahi Ghati, Par-Ghar Gaye Rahim ||

The very sacred river Ganga has merged with the ocean. The ocean has not earned any reputation due to the merger and one can say that the river has lost her reputation. Similarly no one has gained any status by putting up forever at another’s place.

Kharach Badhyo Uddam Ghatyo, Nrupati Nithur Man Keen |
Kahu Rahim Kaise Jiye, Thore Jal Kee Meen ||

The King has become harsh, the expenses are rising too much and there is a fall in productive activity. The fate of such person is similar to a fish that lives in a place with scanty water.

Jaise Jaaki Buddhi Hai, Taisi Kahai Banaay |
Taako Buro Na Maaniye, Len Kaha Soo Jaay ||

One can be adept at speaking within the constraints of his intellect. If he is not speaking nicely to you don’t mind, how can he borrow intellect.

Jihi Anchal Deepak Duryo, Hanyo So Taahi Gaat |
Rahiman Asamay Ke Pare, Mitra Satru Havai Jaat ||

A lady protects a lamp by covering it with aanchal of her saree. The same lamp burns the saree at some bad time. Those who are nourished by love turn inimical if time is bad.

Rahiman Asuva Nayan Dhari, Jiy Dukh Prakat Karei |
Jahi Nikaro Geh Te, Kas Na Bhed Kahi Dei ||

Tears roll out on cheeks and tell the sorrow. Tears are asked to leave body, why they won’t tell the inner secrets.

Rahiman Ab We Birachh Kah, Jinkee Chaah Gambheer |
Baagan Bich-Bich Dekhiat, Sehud Kunj Kareer ||

Now those trees are not seen which provided comfort from sun by it’s loving shadow. Now cactus like thorny plants and shrubs are seen everywhere.

Rahiman Jivha Baavri, Kahigee Sarag Pataal |
Aapu To Kahi Bheetar Rahi, Jooti Khat Kapaal ||

The tongue enjoys being in it’s own mood, it says anything high and low it likes. It remains protected inside and the forehead recieves the slaps.

Rahiman Tab Lagi Thahariye, Daan, Maan, Sanmaan |
Ghatat Maan Dekhiy Jabhi, Turathi Kariy Payaan ||

You should stay at some place as long as you continue to get donation, honour and privelege. If you see that these things are declining, you should leave the place.

Rahiman Khoti Aadi Ko, So Parinaam Lakhaay |
Jaise Deepak Tam Bhakhai, Kajjal Waman Karaay ||

See the cause effect relation. A lamp consumes darkness and when it extinguishes it emits a black smoke.

Rahiman Rahibo Wah Bhalo, Jou Lou Seel Samuch |
Seel Dheel Jab Dekhie, Turant Kijie Kooch ||

One should stay at a place as long as one is greeted with politeness and honour. If people’s kindness shrink one should go away.

Dhan Thoro Ijjat Badee, Kahi Raheem Ka Baat |
Jaise Kul Ki Kulbadhu, Chithdan Maahi Samaat ||

There is no value of money compared to honour. How should Raheem explain this. A daughter-in-law from a good family looks impressive even in very old robes.

Dhani Rahim Jal Pank Ko, Laghu Jiy Piyat Aghay |
Udadhi Badaee Koun Hai, Jagat Piyaso Jaau ||

The mud water is also great. Many small creatures quench their thirst at mud water. Of what greatness the ocean is? The world returns thirsty from it’s shores.

Anuchit Bachat Na Manie, Jadpi Guraysu Gaadhi |
Hai Rahim Raghunath Te, Sujas Bharat Ko Badhi ||

Even great people should not listen to a bad advice. Ram went in exile as per the word given by his father. But Bharat declined advice from elders and renounced kingdom of Ayodhya. The glory of Bharat is no less than the glory of Ram.

Ab Rahim Muskil Padi, Gaadhe Dou Kaam |
Saanche Se To Jag Nahi, Jhoothe Milai Na Raam ||

Rahim says that he is in a great difficulty. If he abides by truth he won’t keep the world in good humour. If he doesn’t abide by truth he will distance himself from Ram.

Aadar Ghate Nares Dhig, Base Rahai Kachhu Naahi |
Jo Rahim Kotin Milai, Dhik Jeewan Jag Maahi ||

If one earns crores of wealth but there is no honour, down to such wealth.

Aap Na Kaahu Kaam Ke, Daar Paat Phal Phul |
Auran Ko Rokat Firai, Rahiman Ped Babool ||

Rahim says that a babool tree is useless as there are no boughs, leaves, fruits and flowers. The only task performed by this tree is to hinder movement of people by it’s thorns.

Ek Saadhe Sab Sadhai, Sab Saadhe Sab Jaay |
Rahiman Moolhi Seechibo, Phoolhi Phalhi Aghaay ||

You should do only one thing with full devotion. If you try to do many things at a time you won’t accomplish anything. You should water roots of a tree properly and you get flowers and fruits.

Antar Daawaa Lagi Rahai, Dhuan Na Pragatai Soy |
Ke Jiy Jaane Aapno, Ja Sir Beetee Hoy ||

Something is burning internally so no smoke is seen. He who has gone through such fire understands what is happening. Others don’t.

Kadli, Seep, Bhujang Mukh, Swati Ek Gun Teen |
Jaisi Sangti Baithie, Taisoi Phal Deen ||

A rain drop of Swati Constellation has three distinct effects depending upon where it falls…
if it falls on a kadali, it becomes camphor
if it falls in a shell, it becomes a pearl
if it falls in snake’s mouth, it becomes poison.
So be aware of the association that you have.

Kamla Sthir Na Rahim Kahi, Yah Jaanat Sab Koy |
Purush Puratan Ki Wadhu, Kyon Na Chanchala Hoy ||

Wealth is never forever. Lakshmi is the wife of Narayan, how can anybody have any permanent claim over wealth.

Karat Nipunai Gun Bina, Rahiman Nipun Hajoor |
Manhu Terat Bitap Chadhi, Hohi Samaan Ko Koor ||

One can’t fool skilled people that one has great skills (when he has none) even if one uses very sweet words while talking to them.

Kahi Rahim Sampati Sage, Banat Bahut Bahu Reeti |
Bipti-Kasoutee Je Kase, Soi Sanche Meet ||

Many people will move very close to you if you have wealth. You will come to know of true friends only when you are passing through adversity.

Kahu Rahim Kaise Nibhai, Ber Ker Ko Sang |
Ve Dolat Ras Aapne, Unke Phaatat Ang ||

How can a plant of berry and banana be together? A berry tree moves it’s branches in it’s own rhythm and leaves of Banana plant are torn.

Kahu Rahim Kaitik Rahee, Kaitik Gai Bihaay |
Maya Mamta Moh Pari, Ant Chale Pachhitaay ||

How much life is remaining now, how much has been passed. Please wake up. If you are entangled in delusion, attachment and infatuation you will repent very much in your last moments.

Kaah Kamri Paamdi, Jaad Gae Se Kaaj |
Rahiman Bhookh Butaie, Kaisyo Mile Anaaj ||

We want protection against cold, it doesn’t matter if we have a coarse sheet or a soft sheet. Whatever we get to feed ourselves, that should satisfy our hunger.

Kaise Nibhai Nibal Jan, Kari Sablan So Bair |
Rahiman Basi Saagar Vishe, Karat Magar So Bair ||

One who is meek should not pit up against a strong person.

Kou Rahim Jahi Kahuke, Dwar Gae Pachheetay |
Sampti Ke Sab Jaat Hai, Bipti Sabai Le Jaay ||

You should never repent for going to someone’s door. Those who have wealth see many people coming to their doors and those who are in distress go to many doors.

Khair, Khun, Khaasi, Khushi, Bair, Preeti, Mad-Paan |
Rahiman Daabe Naa Dabai, Jaanat Sakal Jahan ||

These are the things which cannot be suppressed or hidden. Well-being, Blood, Bouts of Cough, Happiness, Enmity, Drunkenness.

Garaj Aapni Aap So, Rahiman Kahi Na Jaay |
Jaise Kul Kee Kulbadhoo, Par Ghar Jaat Lajaay ||

We can’t ask others to serve our needs. It is just like a daughter-in-law from a good house is bashful at the house of others.

Chhima Baden Ko Chahie, Chhotan Ko Utpaat |
Ka Rahim Hari Ko Ghatyo, Jo Bhrugu Maaree Laat ||

It befits great people to be forgiving and petty people to be destructive. What loss Hari suffered when Bhrugu hit his leg on Hari’s chest.

Jab Lagi Vitt Na Aapune, Tab Lagi Mitra Na Hoy |
Rahiman Ambuj Ambu Binu, Ravi Naahin Hit Hoy ||

No one will be friendly to you unless you have money. The sun is not a friend of a lotus that has no water.

Je Rahim Bidhi Bad Kie, Ko Kahi Dooshan Kadhi |
Chandra Doobro Koobro, Tau Nakhat Te Baadhi ||

Big is beautiful. Moon is better than other stars inspite of it’s everchanging form because it is bigger.

Jo Ghar Hee Me Gusi Rahe, Kadali Supat Sudeel |
To Raheem Tinte Bhale, Path Ke Apat Kareel ||

The plants used for interior decoration are beautiful. But still the plants that provide comfort to the road users are better though they are less beautiful.

Jo Baden Ko Laghu Kahe, Nahi Rahim Ghati Jaahi |
Giridhar Murlidhar Kahe, Kachhu Dukh Maanat Naahi ||

If we call a big thing small, there is no loss of bigness. Lord Krishna who lifted mount Govardhan doesn’t mind if people call him Murlidhar.

Jo Rahim Gati Deep Ki, Kul Kapoot Gati Soy |
Baare Ijiyaaro Lage, Badhe Andhero Hoy ||

A bad child can cause happiness to his family if he burns (takes efforts), if he takes no efforts there is darkness.

O Rahim Man Haath Hai, To Tan Kahu Kin Jaahi |
Jal Me Jo Chhaya Pare, Kaya Bheejti Naahi ||

If one has control over his mind, there is nothing wrong if physically he goes at any place. It is just like a reflection in water can’t make anybody wet.

Jo Vishya Santan Taji, Moodh Taahi Laptaat |
Jyo Nar Daarat Waman Kar, Svaan Swaad So Khaat ||

Good people have shun sensual pleasures, foolish people take delight in sensual pleasures. It is just like someone vommits food eaten earlier due to food poisoning and a dog eats the stuff vomitted with great delight.

Tabhee Lou Jeevo Bhalo, Deebo Hoy Na Deem |
Jag Me Rahibo Kuchit Gati, Uchit Hoy Rahim ||

It is better to live that far where one doesn’t effect any reduction in his charity. A life devoid of giving is a bad state of life.

Taruwar Phal Nahi Khaat Hai, Sarwar Piyhi Na Paan |
Kahi Rahim Parkaaj Hit, Sampati Sanchhi Sujaan ||

A tree doesn’t eat it’s own fruits. A lake doesn’t drink it’s own water. Those who are good accumulate wealth for the welfare of others.

Thothe Baadar Qwar Ke, Jyon Rahim Ghahraat |
Dhani Purush Nirdhan Bhaye, Karai Pachhilee Baat ||

There comes a season where clouds devoid of water thunder loudly. In the same way when rich become poor they talk loudly about their old days.

Thori Kie Baden Ki, Badi Badaai Hoy |
Jyo Rahim Hanumant Ko, Girdhar Kahat Na Koy ||

Lord Krishna lifted mount Govardhan so people call him Giridhar (one who lifts a mount). Hanumanji not only lifted Mount Dronachal, he also flied lifting the mount over a long distance. Still people don’t call him Giridhar. So big people get big honours for the same task performed.

Deen Saban Ko Lakhat Hai, Deenhi Lakhe Na Koy |
Jo Rahim Deenhi Lakhai, Deenbandhu Sam Hoy ||

An afflicted person is looking at everybody, no one looks at the afflicted person. Those who take care of afflicted are divine.

Dono Rahiman Ek Se, Jou Lo Bolat Naahi |
Jaan Parat Hai Kak Pik, Ritu Basant Ke Maahi ||

A cuckoo and a crow look alike if they are silent. Their difference becomes clear when spring season arrives.

Dhoor Dharat Nit Sees Pai, Kahu Rahim Kehi Kaaj |
Jehi Raj Muni-Patni Tari, So Dhundhat Gajraaj ||

Why the elephant is blowing dust on his head with his snout. He is searching for a particle of dust that granted salvation to the wife of a sage.

Naad Reejhi Tan Det Mrig, Nar Dhan Het Samet |
Te Rahim Pasu Se Adhik, Reejhehu Kachhoo Na Det ||

A deer accepts being entrapped as it likes the music played by the hunter. A person offers his life for the sake of money. Those who like something but don’t make any sacrifice for it’s sake are worse than beasts.

Nij Kar Kriya Rahim Kahi, Sidhi Bhaavi Ke Haath |
Paasa Apne Haath Me, Daav Na Apne Haath ||

We can do work but we don’t have any control over it’s outcome. A dicer can throw his dice but can’t control the game.

Pannagbeli Patiwrata, Riti Sam Suno Sujaan |
Him Rahim Belee Dahee, Sat Jojan Dahiyaan ||

A creeper of a bettle leaf is like a person who is loyal to family. In cold when leaves fall, the creeper also dries.

Paawas Dekhi Rahim Man, Koil Saadhe Moun |
Ab Dadur Waqta Bhae, Hamjo Poochhat Koun ||

A cuckoo remains silent in the rainy season as it knows that now it is the time for the frogs to croak.

Bad Maya Ko Dosh Yah, Jo Kabhu Ghati Jaay |
To Rahim Marobo Bhalo, Dukh Sahi Jiyai Balaay ||

There is a problem with prosperity. If a person loses what he has he may fail to adjust with a low standard of living and may prefer to die.

Bade Deen Ko Dukh Sune, Let Daya Ur Aani |
Hari Haathi So Kab Huti, Kahu Rahim Pahichani ||

When people with big heart come to know about someone’s plight, they show mercy. When Gajendra called Vishnu and He hurried to rescue, whether they were knowing each other earlier.

Bade Badai Na Karai, Bado Na Bole Bol |
Rahiman Heera Kab Kahe, Laakh Taka Mam Mol ||

Those who are great don’t boast of themselves. A diamond never says that it’s value is sky high.

Bigri Baat Banai Nahi, Laakh Karao Kin Koy |
Rahiman Fate Doodh Ko, Mathai Na Makhan Hoy ||

There can’t be any reversal when an issue goes beyond it’s limit. Once a milk spoils, can you get butter by stirring.

Bhajau To Kako Mai Bhajau, Tajau To Kako Aan |
Bhajan Tajan Se Bilag Hai, Tehi Rahim Too Jaan ||

Whom should I crave for and against whom should I have aversion. He who is beyond cravings and aversions should be known.

Bhaar Jhoki Ke Bhaar Me, Rahiman Utare Paar |
Pai Boode Majhdhaar Me, Jinke Sir Par Bhaar ||

You should dump the weight of ego at the garbage yard and then cross the river of transmigration. Others with the weight of ego on their head are bound to sink mid-stream.

Bhaavi Kaahu Naa Dahi, Bhaavi-Dah Bhagwaan |
Bhaavi Aisi Prabal Hai, Kahi Rahim Yah Jaan ||

We can’t escape from the effect of our accumulated actions. The mechanism of discharge is very potent. If we offer ourselves at the feet of God we won’t react while the discharge takes place.

Bhoop Ganat Laghu Gunin Ko, Guni Ganat Laghu Bhoop |
Rahiman Giri Te Bhoomi Lau, Lakhou Ekai Roop ||

A King considers persons with knowledge to be short. Those who have knowledge consider King to be short. If one climbs a mount, one sees that none is short or tall, all are same.

Mange Ghatat Rahim Pad, Kitee Karo Badhi Kaam |
Teen Paid Basudha Kari, Tau Baawne Naam ||

You may do something very great. If you ask anything from others your greatness loses it’s height. God Vishnu very intelligently took away all the three worlds from King Bali but still he is known as baman which means short.

Mange Mukri Na Ko Gayo, Kehi Na Tyago Saath |
Manngat Aage Sukh Lahyo, Tai Rahim Raghunaath ||

Generally people will not keep their commitment if they have commited to give something. If someone asks for something there is bright chance that the person whom request is made goes away. Lord Ram gave Lanka to Vibheeshan without his asking for the same and made him happy.

Moodhmandali Me Sujan, Thaharat Nahi Bisekhi |
Syam Kachan Me Set Jyo, Doori Keejiyat Dekhi ||

An intelligent person doesn’t stay for long in the company of fools. Just like a grey hair is swiftly removed from a lock of black hair.

Yaddyapi Avani Anek Hai, Koopwant Sari Taal |
Rahiman Maansarowarhi, Mansa Karat Maraal ||

There are many wells, lakes and rivers on this earth. But the swan likes to be at the Manas Lake always.

Yah Rahim Nij Sang Lai, Janmat Jagat Na Koy |
Bair, Preeti, Abhyas, Jas Hot Hot Hi Hoy ||

Enmity, affinity, practice and success none can claim by birth. One takes time and develops these things slowly.

Yah Rahim Maane Nahi, Dil Se Nawa Na Hoy |
Cheeta, Chor, Kamaan Ke, Nave to Avagun Hoy ||

It is good to bow. But a panther, a theif and a bow don’t do any good when they bow.

Yo Rahim Sukh Dukh Sahat, Bade Log Sah Saanti |
Uvat Chand Jehi Bhanti So, Athwat Taahi Bhaanti ||

Those who are great they pass through comforts and discomforts with equanimity. It is just like a moon that rises has to set. So why to disturb balance of mind for comforts or discomforts.

Ran Ban Byadhi Bipatti Me, Rahiman Marai Na Roy |
Jo Rakshak Janani-Jathar, So Hari Gae Ki Soe ||

If you are in a battle-field, woods, suffering from a disease, or passing through adversity, you should not die of weeping. The God that protected you in mother’s womb has not gone to sleep.

Rahiman Aata Ke Lage, Baajat Hai Din-Rati |
Ghiu Shakkar Je Khaat Hai, Tinkee Kaha Bisaati ||

A mrudang is applied some fluor on it’s mouth and it shouts always. There is no wonder that those who eat clarified butter and sugar will outperform a mrudang.

Rahiman Ochhe Naran So, Bair Bhalo Na Preeti |
Kaate Chaate Svan Ke, Dou Bhaati Vipreet ||

It is not good to have affinity or enmity with a third rate person. If a dog has affinity for you it will lick you, if it becomes adverse it will bite you. Both the things are not good.

Rahiman Kahat Su Pet So, Kyo Na Bhayo Too Peeth |
Reete Anareete Karai, Bhare Bigaarat Deeth ||

Rahim says that stomach should have been back. If stomach is empty it makes one do something immoral and if it is full it corrupts the eye-sight.

Rahiman Kutil Kuthar Jyo, Kari Daarat Dwai Took |
Chaturan Ke Kasqat Rahai, Samay Chook Kee Hook ||

If an intelligent person lets the moment slip he has to repent later. The agony of his heart slits his heart into pieces like a hard knife.

Rahiman Chhup Hwai Baithie, Dekhi Dinan Ko Pher |
Jab Neeke Din Aaihai, Banat Na Lagihai Der ||

If one is not having good days, one should keep quiet. When good days come everything is set right in no time.

Rahiman Chhote Naran So, Hot Bado Nahi Kaam |
Maddho Damaamo Naa Banai, Sou Chooho Ke Chaam ||

Those who are petty are good for nothing. You can’t have a leather for covering a drum by using leather of 100 rats.

Rahiman Jag Jeewan Bade Kaahu Na Dekhe Nain |
Jaay Dashanan Achhat Hi, Kapi Laage Gath Lain ||

No one has gotten any honour during his lifetime by the dint of his might. Even the mighty Ravana saw end of his rule at the hands of monkeys.

Rahiman Jo Tum Kahat Ho, Sangati Hee Gun Hoy |
Beech Ukhaari Rasbhara, Ras Kaahe Naa Hoy ||

If you say that association with good gives rise to good qualities, why weeds growing around sugar-cane become sweet.

Rahiman Jo Rahibo Chahai, Kahai Waahi Ke Daav |
Jo Baasar Ko Nisi Kahai, Tou Kachpachi Dikhav ||

If you want to please your Master, you should always agree to what he says.

Rahiman Teen Prakar Te, Hit Anhit Pahichaani |
Par-Bas Pare, Paros-Bas, Pare Mamila Jaani ||

You will come to know whether someone is friendly to you when you depend on him for something, live in his neighbourhood and when you face a law-suit.

Rahiman Daani Daridratar, Tau Jaanchibe Jog |
Jyon Saritan Sookha Pare, Kua Khadawat Log ||

One can always demand something from a person with charitable disposition even when he becomes poor. People dig wells in the river-area when rivers dry.

Rahiman Dekhi Baden Ko, Laghu Na Dijie Daari |
Jaha Kaam Aawai Sui, Kaha Karai Tarwari ||

One should not throw away a small article if one gets a big article. If we need a needle, the purpose won’t be served by a sword.

Rahiman Nij Man Kee Bithaa, Manhi Raakho Goy |
Suni Athilaihai Log Sab, Baati Na Laihai Koy ||

One should keep one’s sorrow concealed. People will not share your sorrow. They may listen and laugh.

Rahiman Nij Sampati Bina, Kou Na Vipti-Sahay |
Binu Paanee Jyo Jalaj Ko, Nahi Ravi Sakai Bachaay ||

We can tide over our problems by using our resources, others won’t help. If a lotus doesn’t have water, the Sun can’t save it.

Rahiman Paani Rakhie, Binu Paani Sab Soon |
Paani Gae Na Ubarai, Moti Maanush Choon ||

One should guard one’s respect. De-hydration renders a pearl, a man and lime useless.

Rahiman Preeti Na Keejie, Jas Kheera Ne Keen |
Oopar Se To Dil Mila, Bheetar Faake Teen ||

One should not love a person who appears to be speaking with one heart but in reality his heart is segmented like a cucumber.

Rahiman Bahu Bheshaj Karat, Vyadhi Na Chhaadat Saath |
Khag Mrug Basat Arog Ban, Hari Anaath Ke Naath ||

I recieved many medical treatments and took many medicines but still the disease is there. In woods birds and beasts are healthy as they live a natural life. Really God supports the supportless.

Rahiman Bheshaj Ke Kie, Kaal Jeeti Jo Jaat |
Bade-Bade Samrath Bhaye, Tou Na Kou Mari Jaat ||

If it was possible to defeat death by medicines, so many wealthy people in the world would not have died.

Rahiman Manhi Lagaaike, Dekhi Lehu Kin Koy |
Nar Ko Bas Karibo Kaha, Narayan Bas Hoy ||

Why don’t anyone understand this truth by paying attention. Not just a human being but even God can be made ours.

Rahiman Marag Prem Ko, Mat Matiheen Majhaav |
Jo Dighai To Phir Kahoo, Nahi Dharne Ko Paav ||

This is a path of love. Those who are devoid of intellect should not come here. If one skids, one falls forever.

Rahiman Yah Tan Soop Hai, Leeje Jagat Pachhor |
Halukan Ko Udi Jaan De, Garue Raakhi Bator ||

Your body is like a soop (it is a rectangular implement of bamboo like a dish with raised edges on three sides and with no edge on one side. It also has some down slope on the side that has no edge.). A woman puts some wheat grain in soop and briskly moves it up and down with the open edge away from her. The little stones and other things are thrown at the open edge and grain remains inside. She throws away these useless things and thus cleans grain. In the same way one should throw away all impurities and retain all good and wholesome things one comes across in his life.

Rahiman Raaj Sarahie, Sasi Sam Sukhad Jo Hoy |
Kaha Baapuro Bhaanu Hai, Tapyo Taraiyan Khoy ||

A King should be like the Moon. The Sun creates too much heat and it also drives away all twinkle stars.

Rahiman Ris Ko Chhaadi Ke, Karau Gareebee Bhes |
Meetho Bolo Nai Chalo, Sabai Tumhari Des ||

One should shun anger and look like a deprived man. One should speak sweet words and move gently. He will find that as if he is with his own people wherever he goes.

Rahiman Laakh Bhali Karo, Aguni Na Jaay |
Raag Sunat Pay Piathoo, Saap Sahaj Dhari Khaay ||

You may be very kind to a wicked person, he won’t shun his wickedness. You may play music to a snake and you may also offer him milk, still it will chase you and bite.

Rahiman Vidya Buddhi Nahi, Nahi Dharam Jas Daan |
Bhoo Par Janam Vritha Dharai, Pasu Bin Poochh-Vishaan ||

One who doesn’t know any art, who is devoid of intellect,lacks equity, fame and charity, he is a beast though he doesn’t have any horns or tail.

Rahiman Vipdaahu Bhalee, Jo Thore Din Hoy |
Hit Anhit Yaa Jagat Me, Jaani Parat Sab Koy ||

It is better to have adversity for few days. One comes to know what is harmful and what is beneficial for him.

Rahiman Ve Nar Mar Chuke, Je Kahu Mangan Jaahi |
Unte Pahle Ve Mue, Jin Mukh Niksat Naahi ||

Those who ask others for something are like dead beings. Those who decline to offer help die earlier.

Rahiman Sudhi Sabse Bhali, Lagai Jo Baarambaar |
Bichhure Maanush Phir Milai, Yahai Jaan Awtaar ||

It is good to remember someone time and again. God takes birth only when people remember him.

Raam Na Jaate Harin Sang, Seey Na Raavan-Saath |
Jo Raheem Bhaavi Katahoo, Hot Aapne Haath ||

The thing that has to happen happens. There is nothing which one can do for that. Why Raam chased a deer, why Raavan kidnapped Sita??

Roop Katha, Pad, Chaarupat, Kanchan, Doha, Laal |
Jyo-Jyo Nirkhat Sookshm Gati, Mol Raheem Bisaal ||

One can evaluate beauty, character, poem, robes, ornaments only when one has the subtle sight needed for their evaluation.

Baru Raheem Kaanan Bhalo, Waas Kariy Phal Bhog |
Bandhu Madhya Dhanheen Hwai, Basibo Uchit Naa Yog ||

One should not remain amidst his friends and relatives after losing wealth. It is better to go to woods and survive on fruits there.

Ve Raheem Nar Dhanya Hai, Par Upkaari Ang |
Baatanwaare Ko Lagai, Jyo Mehdi Ko Rang ||

Those people are blessed who have charity inscribed on each and every cell of their body. Those who offer fragrance to others are always full of fragrance.

Sabai Kahaawai Laskaree, Sab Laskar Kah Jaay |
Rahiman Selh Joee Sahai, Soi Jageere Khaay ||

There is no need to put on the robes of a military man. If you want to earn reputation you should have courage to face weapon attacks.

Samay Dashaa Kul Dekhi Kai, Sabai Karat Sanmaan |
Rahiman Deen Anaath Ko, Tum Bin Ko Bhagwaan ||

Everyone gives honour if one is having good time, one is doing well or one belongs to a good faimly. Rahim says that O’ God There is none other than You to look after a deprived person.

Samay Paay Phal Hot Hai, Samay Paay Jhari Jaat |
Sada Rahai Nahi Ek See, Kaa Rahim Pachhitat ||

Why are you worried dear? Not all times are same. There is a season when trees are loaded with fruits and leaves and there are no fruits and leaves in fall.

Samay-Laabh Sam Laabh Nahi, Samay-Chook Sam Chook |
Chaturan Chitt Rahiman Lagee, Samay Chook Kee Hook ||

Those who are good at acting in time, do maximum good to themselves. Those who let the moment slip out of their hands commit a grave mistake. Those who are intelligent are always concerned about the opportunities they have lost.

Sar Sookhe Panchhi Ude, Aur Saran Samahi |
Deen Meen Bin Pankh Ke, Kahu Raheem Kah Jaahi ||

The lake has dried. The birds inhabiting the lake flied away to other lakes. How can the poor fish without wings move away.

Swaasah Turiy Jo Uchchre, Tiy Hai Nihchal Chitta |
Poora Para Ghar Jaanie, Rahiman Teen ||

A yogi who has calmed his mind is great. A good house-wife loyal to her home is great. A son who burns like a lamp for the sake of his family is great.

Saadhu Sarahai Saadhuta, Jatee Jogita Jaan |
Rahiman Saanche Soor Ko, Bairi Karai Bakhaan ||

Good people appreciate goodness. Those who are good at controlling mind appreciate control of mind. Those who are valiant are appreciated even by their enemies.

Santat Sampati Jaan Ke, Sab Ko Sab Kuchh Det |
Deenbandhu Binu Deen Kee, Ko Raheem Sudhi Let ||

People make calculations while making gifts and see that eventually they won’t incur any loss. Only God takes care of the poor.

Sampati Bharam Gavaike, Haath Rahat Kachhu Naahi |
Jyo Raheem Sasi Rahat Hai, Diwas Akashi Maahi ||

Those who lose money due to delusion don’t have anything with them. Their condition is similar to the moon in the sky during the day.

Sasi Sankoch, Saahas, Salil, Maan, Saneh Raheem |
Badhat-Badhat Badhi Jaat Hai, Ghatat-Ghatat Ghati Som ||

The Moon, shyness, valiance, water, honour and love, all these rise and fall.

Seet Harat, Tam Harat Nit, Bhuwan Bharat Nahi Chook ||
Rahiman Tehi Ravi Ko Kaha, Jo Ghati Lakhai Olook ||

The sun dispels cold, ends darkness and fills the whole universe with light. How can someone say anything to the Sun if an owl can’t see during the day.

Hit Raheem Itau Karai, Jaakee Jaha Basaat |
Nahi Yah Rahai, Na Wah Rahai, Rahe Kahan Ko Baat ||

One who does good does so as per his capacity. He who does good is not there, similarly he to whom good is done is also not there. What we have is the memory with us.

Hoy Na Jaaki Chaah Dhig, Phal Raheem Ati Door |
Baadhehu So Binu Kaajhi, Jaise Taar Khajoor ||

What is the point in growing big like a dates tree or a bamboo. There is no comfort provided to people as there is no shadow and the fruits are also out of reach.

Ochhe Ko Satsang, Rahiman Tajhu Angaar Jyo |
Taato Jaare Ang, Seere Pai Kaari Lage ||

Please part with the company of a mean person. It is like a fire. It will burn you until it extinguishes and thereafter it will blacken you.

Rahiman Mohi Na Suhaay, Ami Paavai Maan Banu |
Baru Vash Dey Bulaay, Maan-Sahat Marbo Bhalo ||

I don’t like the nectar that is offered without any honour. I will accept poison if someone offers respectfully. It is better to die with honour.

Chitrakoot Me Rami Rahe, Rahiman Awadh-Nares |
Jaa par Bipdaa Parat Hai, So Aawat Yahi Des ||

Lord Rama enjoyed his stay in Chitrakoot. People come to Chitrakoot when they are in trouble.

E Raheem Dar-Dar Phirhi, Mangi Madhukree Khaahi |
Yaaro Yaaree Chhadido, Ve Raheem Ab Naahi ||

Rahim goes door to door and lives on the alms. Dear friends you may snap the friendship now as Raheem has changed.

Denhaar Kou Aur Hai, Bhejat So Din Rain |
Log Bharam Ham Pai Dharai, Yaate Neeche Nain ||

I am keeping my eyes low. People think that I am giving. He who is giving is someone else. He is giving day and night. So don’t give me any credit for what you receive.

Sant Kabir Ke Dohe

HIPOCRACY IN RELIGIONS
JANAMTE MAANUS HOT SAB, YAH JAANAT SANSAAR ||
BANCHAK SOOD KARAVAHI, KAHAI KABIR PUKAAR ||
(All are born as human beings and everybody knows this fact. The deceptors have divided the Humanity into high and low)
AASAN MAARE KYAA BHAYA, GAYI NA MAN KI AAS ||
JYON TELI KE BAIL KO, GHAR HI KOS PACHAS ||
(Just as the bullock of the oilman though near home thinks it far, in the same way, it is useless if one has perfected yogasanas but still succumbs to the mind’s desires)
AATAM BUDHI JANAI NAHIN, NHAVAI PRATAHKAAL ||
LOK LAAJ LIYAI RAHE, LAGA BHASAM KAPAAL ||
(For fear of others derision, man indulges in outward shows like bathing at dawn, smearing ash on his forehead without bothering to understand the real importance of self knowledge that God dwells in him)
JAP TAP DIKHAW THOTHRA, TIRATH BRAT BISWAS ||
SUVA SEMAL SOIAA, JYON JAG CHALAA NIRAS ||
(Just as a parrot tasting a semira bud gets stuck in its fibrous structure, an ignorant man for mere show, visits sacred places and worships in the temple without any results)
HINDU MOOE RAM KAHI, MUSALMAN KHOODAAY ||
KABIR KAHAI SO JIBATAA, DOOHOON KAHA NA JAYE ||
(At the time of their death, Hindus chant the name of Rama and Muslims that of Khuda, but neither of them remember God’s name during their lifetime)
BAAMAN SE GADAAHA BHALA, AAN JAAT SE KUTA ||
MULLA SE MURGA BHALLA, RAAT JAGAVAI SUTA ||
(Kabir implies that by dividing men into castes, clans and creeds encourage quarrels and feads. Better than the Brahmin is a donkey who does useful service to man, a dog is better than a low caste as it guards the house, a cock is better than a Mullah who wakes up a man from his sleep)
KATHANI THOTHI JAGAT MEIN, KARNI UTTAM SAAR ||
KAHAT KABIR KARNI SAFAL, UTARE MANJIL PAAR ||
(Man should shun idle gossip as it is useless and engage himself in good deeds, which will lead him in reaching the goal)
HINDU KAHE RAM MOHI PYAARAA, TURAK KAHAI RAHIMAANAA ||
AAPAS MEIN DOU LARI MUE, MARAM NA KAHU JAANAA ||
(Hindus and Muslims fight in the name of Rama and Rahim to destruction. But neither of them understands the fact that the Almighty is one)
KITANE MANAAOONPAAON PARI, KITANE MANAOONROYE ||
HINDU POOJE DEBATA, TURAK NA KAHU KOY ||
(It is neither rewarding to offer worship to the stone idols in the temple (instead of God within) as do the Hindus or to take shelter of no God for attaining salvation (as do the Muslims). God who dwells in the heart of every being is the one whose shelter has to be sought)
SAADHU BHAYA TO KYA BHAYA, JO NAHIN BOLE BICHAR ||
HATAI PARAII AATMA JEEV LIYE TARBAAR ||
(Learned man’s knowledge will be of no avail to him if he does not have control over his tongue. Due to his utterances will injure others and will cause loss of peace of mind)
BIRTH AND DEATH
JAISA KORI REJAA BUNAI, NEERA AAWAI CCHOR ||
ESAA LEKHA MEECH KAA, DAUR SAKE TO DAUR ||
(Just as the weaver weaving thread by thread brings the end near, in the same way we cannot run away from death because death leads us step by step)
ALMIGHTY GOD
PAITHA HAI GHAT BHITAR, BAITHA HAI SAACHET ||
JAB JAISI GATI CHAAHAT, ATB TAISI MATI DET ||
(The Almighty God, sitting alertly in each individual guides the
actions of man according to his (Almighty’s) will)
AADI HATI SAB AAP MAIN, SAKAL HATI TA MAHIN ||
JYON TARAWAR KE BEEJ MAIN, DAAR PAAT PHAL CHAAHIN ||
(God is the source of all the creations of the Universe in the same way as the seed, which holds the leaves, the branches and the fruits)
JYON NAINON MEIN PUTLI, TYON MAALIK GHAT MAAHIN ||
MOORAKH LOG JAAHIN, BAAHAR DHOODHAN JAAHIN ||
(God exists in one’s heart like the pupil in the eye. But ignorance causes a man to seek him far and wide)
MIND CONTROL AND PURITY OF MIND
BHOOP DUKHI, AWADHOOT DUKHI, DUKHI RUNK BIPARITA ||
KAHE KABEER YE SAB DUKHI, SUKHI SANT MUN JEET ||
(The king, the beggar and the saint all of them experience distress and sorrow. Happy and content is he, who controls the mind)
MUN PANCHI TAB LAGI UDDAI, BISAY BAASANA MAAHIN ||
GYAAN BAAJ KAI JHAPAT ME JAB LAG PADE NAAHIN ||
(‘Mind bird’ flies here and there to taste mundane pleasure as long as the ‘knowledge-falcon’ does not take it over)
THE PERVERSIONS
KAAM KAHAR ASWAAR HAI, SAB KO MAARE DHAYE ||
KOI EKA HARIJAN UBHARE, JAAKAA RAAM SAHAYA ||
(There are few people who by the grace of the Almighty escape the push and pull of Kama or lust)
JO KABAHUN KE DEKHIYE, BIR BAHAN KAI MAAAY ||
AATHA PAHAR ALAG RAHAI, TAKO KAAL NA KHAYE ||
(One who avoids casting his eyes on any woman and considers her as sister or mother will not be devoured by death)
MOHA (ATTACHMENT)
KABIR MAAYAA MOHINI, MAARE JAAN SUJAANBHAAGAAHI CHUUTE NAHIN, BHARI BHARI MARE BAAN ||
(Attachment like a tempting woman bewitches even the wise man, if driven away, she hits back again and again)

Chanakya Neeti

1. MONEY
TYAJANTI MITRAANI DHANAIRVIHIINAM ||
DAARAASHCHA BHRITYAASHCHA SUHRIJJANASCHA ||
TAM CHARTHAVANNTAM PUNARAASHRAYANTE ||
HYARTHO HI LOKE PURUSHASYA BANDHUH ||

(The money- less man is quit cold by friends, wife, and well wishers and dependents, on his becoming rich, they hang on to him again. In this world, money is only the true ally of man.)

ANYAAYOPAARJITAM VITTAM DASHAVARSHAANI TISTHATI ||
PRAPTE CHAIKAADASHE VARSHE SAMULANCHA VINASYATI ||

(Unjustly earned money stays only for ten years. In the eleventh year, it disappears along with the Principal)

2. BIRTH AND DEATH
JANMA MRITYUN HI YAATYEKO BHUNAKTYEKAH SHUBHAASHUBHAM ||
NARAKE CHA PATATYEKA, EKO YAATI PARANGATIM ||

(Everyone experiences birth and death alone, he also faces the consequences of good and bad actions, and he faces the hell and heaven alone)

3. DESTINY
PATRAM NAIVA YADA KARIRVITAPE DOSHO VASANTASYA KIM ||
GHUKO NAIVA VILOKATE YADI DIVA SURYASYA KIM DUSHANAM ||
DHAARAA NAIVA PATANTI CHATAKMUKHE MEGHASYA KIM DUSHANAM ||
YATPURVAM VIDHINAA LALAATALIKHITAM TANMAARJITUM KAH KSHAMAH ||

(It is not the fault of spring season, if leaves don’t grow on a KARIRA tree. It is not the fault of the sun if the owl can’t see during the day. Cloud is not to be blamed if no raindrops fall into the mouth of the cuckoo. One is powerless to wipe off the destiny inscribed on one’s forehead)

AAYUH KARMA CHA VITTAM CHA VIDDYA NIDHANAMEYA CHA ||
PANCHAITAANI HI SRIJAYANTE GARBHASTHASYAIVA DEHINAH ||

(Life-span, occupation, wealth, education and ‘How death will occur, these five things are determined while a person is in the womb of the mother)

RANKANKAROTI RAJAANAM RAJAANAM RANKAMEVA CHA ||
DHANINAM NIRDHANAM CHAIVA NIRDHANAM DHANINAM VIDHIH ||

(The beggar becomes a king and the king becomes miserly. Destiny makes the rich poor and the poor are made rich by destiny)

4. ALMIGHTY GOD
AGNIRDEVO DVIJAATINAAM MUNINAAM HRIDI DAIVATAM ||
PRATIMA SVALPABUDDHINAM SARVATRA SAMADARSINAAM ||

(Brahmin (Dvija) believes God to be in fire. Sage believes God to be in the heart itself. A person with little knowledge thinks that God resides in the Idol. But a man with just knowledge knows that God is omnipresent)

NA DEVO VIDDYATE KAASTH, NA PAASHAANE NA MRINMAYE ||
BHAAVO HI VIDDYATE DEVASTASMAADVBHAAVO HI KAARANAM ||

(The deity neither dwells in a piece of wood or in a stone or clay model He dwells in one’s faith)

5. DUTIES
MAATRU DEVO BHAVAH! PITRU DEVO BHAVAH! ||
AACHAARYA DEVO BHAVAH! ATITHI DEVO BHAVAH! ||

(MOTHER, FATHER, TEACHER AND GUEST are perceivable Deities)

EKENAAPI SUPUTRENA VIDDYAYUKTENA SAADHUNAA ||
AAHLAADITAM KULAM SARVAM YATHAA CHANDRENA SHARVARI ||

(As the moon illuminates up in the night, in the same way only one good son who is well educated and upright is a delight to the whole family)

KIM JAATAIRBAHUBHIH PUTRAIH SHOKASANTAAPKAARAKAIH ||
VARAMEKAH KULAALAMBI YAATRA VISHRAAMYATE KULAM ||

(One virtuous son is enough than a hundred duds for only one moon can dispel the darkness and not the stars though they are in thousands)

EKEN SHUSKAVRIKSHENA DAHYAMAANENA VAHVINAA ||
DAHYATE TADVANAM SARVAM KUPUTRENA KULAM YATHAA ||

(A wicked son causes distress to the whole family, in the same way as one dried up burning tree makes the whole forest to burn)

6. DUTY OF PARENTS TOWARDS THEIR CHILD

LAALAYETPANCHA VARSHANI, DASHA VARSHAANI TADAAYET ||
PRAAPTE TU, SHODASHE VARSHE, PUTRAM MITRAVADAACHARET ||

(A child should be given all the love and affection for the first five years. The next ten years, discipline should be taught to him strictly. A son should be treated as a friend after the age of sixteen).

7. DUTY OF A WIFE

SAA BHAARYAA YAA SUCHIRDAKSHA SAA BHAARYA YAA PATIVRATAA ||
SAA BHARYAA YAA PATIPRITA SAA BHARYAA YA PRIYAVAADINI ||

(Wife is she who is chaste and deft, she swears only by her husband and she takes delight in her husband and she is soft spoken).

8. MIND CONTROL AND PURITY OF MIND
MANA EVA MANUSHYAANAAM KAARANAM BANDHMOKSHAYOH ||
BANDHAAYA VISHAYAASANGO MUKTAYAI NIRVISHAYAM MANAH ||

(The human mind is the cause of bondage and deliverance. The love for pleasure enslaves us but indifference towards it, liberate us).

NAASTI KAAMSAMO VYAADHIRNAASTI MOHASAMO RIPUH ||
NAASTI KOPASAMO VAHNIRNAASTI GYAANAATPARAM SUKHAM ||

(Passion causes distraction of the mind, the delusion is the biggest enemy of the mind, and Anger burns the mind the most. One who possesses the enlightened mind is the happiest)

9. ANGER (KRODHA)
KRODHO VAIVASVATO RAAJAA TRISHNAA VAITARNI NADII ||
VIDDYA KAAMDUHA DHENUH SANTOSHO NANDANAM VANAM ||

(Anger is the king of death, greed is the river of hell, knowledge is the wish granting cow and contentment is the celestial garden)

10. GREED (LOBHA)
DHANESHU JIVITAVYESHU STRISHU CHAAHAARKARMASU ||
ATRIPTAH PRANINAH SARVE YAATAA YAASYANTI YAANTI CHA ||

(Man is unsatisfied with life, women and food because it does not have permanence. Man has to leave all his belongings one day)

11. ATTACHMENT (MOHA)
YASYA SNEHO BHAYAM TASYAA, SNEHO DUHKHASYAA BHAAJANAM ||
SNEHAMULANI DHUKHANI SNEHAM TYAKTVA VASETSUKHAM ||

(Attachment is the root cause of fear and suffering by giving up attachment one gains happiness)

Sant Raidas Ke Dohe

Our salutations to Sant Raidas, one of the greatest devotees of God
Main Apno Man Hariju Se Joryo
Hariju Se Jori Saban So Toryo |
Sab Hi Pahar Tumhari Aasaa,
Man Kram Bachan Kahai Raidasa ||

Sant Raidas says that he has severed all links with the world. He has joined all links with Shri Hari. Now by all means he will maintain purity of mind.

Jaat Bhi Ochi, Karam Bhi Ocha,
Ocha Kisab Hamara,
Niche Se Prabhu Uncha Kiyo Hai,
Kaha Raidas Chamara ||

Don’t feel sad if you are born in a lower caste. Wake-up to your relation with the God and rise to a higher level.

Prabhuji ! Tum Chandan, Hum Pani |
Jaaki Ang Ang Baas Samaani ||
Prabhuji ! Tum Ghan, Ban Hum Mora |
Jaise Chitwat Chand Chakora ||
Prabhuji ! Tum Deepak Hum Baati,
Jaaki Jyoti Barai Dini Raati ||
Prabhuji ! Tum Moti, Hum Dhaga |
Jaise Sonhe Milat Suhaga ||
Prabhuji ! Tum Swami, Hum Dasa |
Aisi Bhakti Karai Raidasa ||

O Lord, we are the water. You are the sandalwood that perfumes the water and is present equally everywhere in the water. O Lord, we are forest. You are the cloud. As a Chakora Bird is thirsty for a raindrop directly falling into its mouth from the cloud, so we are for You. O Lord, You are the light (deepak) and we are the thread(baati) that burns to sustain the ever glowing flame. O Lord, we are the thread and you are the beautiful pearls of the mala. O Lord, You are the master. We are Your servants. Let this be the way of my devotion forever.

Jo Tum Toro Ram, Mai Nahi Toro |
Tum So Tori Kavan So Joro ||
Teerath-Barat Na Karao Andesa |
Tumhare Charan Kamal Ke Bharosa ||
Jaha-Jaha Jau Tumhari Pooja |
Tumsa Dev Aur Nahi Dooja ||

O Lord Rama, You snapped relation with me. I have not. I cannot because then with whom I will join. I do not do rituals and pilgrimage because I do not know the methods and techniques. I have taken refuge at Your lotus-feet. Whatever I do, I offer to You as Your Pooja. Who else is there to take the doership of my actions.

Narhari ! Chanchal Hai Mati Meri, Kaise Bhagati Karu Mai Teri |
Tu Mohi Dekhe, Hou Tohi Dekhu, Preeti Paraspar Hoi ||
Tu Mohi Dekhe, Tohi Na Dekhu, Yah Mati Sab Budhi Khoi ||
Sab Ghat Antar Ramsi Nirantar, Mai Dekhan Nahi Jana |
Gun Sab Tor, Mor Sab Avagun, Krut Upakar Na Maanaa ||
Mai-Tai, Tori-Mori Asamjhi So, Kaise Kari Nistara |
Kah Raidas Krushna Karunamaya ! Jai Jai Jagat Adhara ||

O God Narhari ! My mind is uneasy. How should I worship You. You see me. I see You. This is how the relationship of love is built. You see me. I don’t see you. This behaviour is devoid of sanity. You are all-pervading ever looking at me. I can’t see You. You own all merit. I own all demerit. I don’t recognise your obligation. My-Yours this dilemma can be removed in what manner. O Lord Krishna You are full of compassion. Victory to You, the support of this world.

Read some dohas of Kabir here and read more at kabirweb

The right site to view the following dohas is www.kabirweb.com
Bura Jo Dekhan Main Chala, Bura Naa Milya Koye
Jo Munn Khoja Apnaa, To Mujhse Bura Naa Koye
I searched for the crooked, met not a single one
When searched myself, “I” found the crooked one
Kaal Kare So Aaj Kar, Aaj Kare So Ub
Pal Mein Pralaya Hoyegi, Bahuri Karoge Kub
Tomorrows work do today, today’s work now
if the moment is lost, the work be done how
Aisee Vani Boliye, Mun Ka Aapa Khoye
Apna Tan Sheetal Kare, Auran Ko Sukh Hoye
Speak such words, sans ego’s ploy
Body remains composed, giving the listener joy
Dheere Dheere Re Mana, Dheere Sub Kutch Hoye
Mali Seenche So Ghara, Ritu Aaye Phal Hoye
Slowly slowly O mind, everything in own pace happens
Gardner may water a hundred buckets, fruit arrives only in its season
Sayeen Itna Deejiye, Ja Mein Kutumb Samaye
Main Bhi Bhookha Na Rahun, Sadhu Na Bhookha Jaye
Give so much O God, suffice to envelop my clan
I should not suffer cravings, nor the visitor goes unfed
Jaise Til Mein Tel Hai, Jyon Chakmak Mein Aag
Tera Sayeen Tujh Mein Hai, Tu Jaag Sake To Jaag
Like seed contains the oil, fire in flint stone
Your temple seats the Divine, realize if you can
Mangan Maran Saman Hai, Mat Koi Mange Beekh
Mangan Se Marna Bhala, Yeh Satguru Ki Seekh
Begging is like perishing, none should go imploring
It is better to die than beg, this is pure Guru’s teaching
Maya Mari Na Man Mara, Mar Mar Gaye Shareer
Asha Trishna Na Mari, Keh Gaye Das Kabir
Neither illusion nor the mind, only bodies attained death
Hope and delusion did not die, so Kabir said.
Kabira Khara Bazaar Mein, Mange Sabki Khair
Na Kahu Se Dosti, Na Kahu Se Bair
Kabira in the market place, wishes welfare of all
Neither friendship nor enmity with anyone at all
Pothi Padh Padh Kar Jag Mua, Pandit Bhayo Na Koye
Dhai Aakhar Prem Ke, Jo Padhe So Pandit Hoye
Reading books everyone died, none became any wise
One who reads the word of love, only becomes wise
Dukh Me Simran Sab Kare, Sukh Mein Kare Na Koye
Jo Sukh Mein Simran Kare, Tau Dukh Kahe Ko Hoye
In anguish everyone prays to Him, in joy does none
To One who prays in happiness, how sorrow can come
Akath Kahani Prem Ki, Kutch Kahi Na Jaye
Goonge Keri Sarkara, Baithe Muskae
Inexpressible is the story of Love
It cannot be revealed by words
Like the dumb eating sweet-meat
Only smiles, the sweetness he cannot tell
Gur Dhobi Sikh Kapda, Saboo Sirjan Har
Surti Sila Pur Dhoiye, Nikse Jyoti Apaar
Guru the washer man, disciple is the cloth
The name of God liken to the soap
Wash the mind on foundation firm
To realize the glow of Truth
Jeevat Samjhe Jeevat Bujhe, Jeevat He Karo Aas
Jeevat Karam Ki Fansi Na Kaati, Mue Mukti Ki Aas
Alive one sees, alive one knows
Thus crave for salvation when full of life
Alive you did not cut the noose of binding actions
Hoping liberation with death !
Kabir Man Nirmal Bhaya, Jaise Ganga Neer
Pache Pache Har Phire, Kahat Kabir Kabir
Kabir’s mind got cleansed like the holy Ganges water
Now everyone follows, saying Kabir Kabir
Chinta Aisee Dakini, Kat Kaleja Khaye
Vaid Bichara Kya Kare, Kahan Tak Dawa Lagaye
Worry is the bandit that eats into one’s heart
What the doctor can do, what remedy to impart?

Gems of Spirituality – Kabir Ke Dohe

|| 1 ||
Maya Taje To Kya Hua
Maan Taja Naa Jaaye
Maan Bade Munivar Gaye
Maan Saban Ko Khaye
It is very easy to give up efforts and lose weath. It is really very difficult to give up the ego. Very great and analytical people have fallen victim to ego. The ego is killing one and all.


|| 2 ||
Kade Abhimaan Na Kijiye
Kaha Kabir Samajhaye
Ja Seer Aha Jo Sanchare
Pade Chouryasi Jaaye
Don’t have ego. He who has ego is restless always.


|| 3 ||
Sukha Ke Sangi Swarthi
Dukh Me Rahate Door
Kahe Kabir Parmarathi
Dukh Sukh Sada Hujoor
The fair weather friends stay away when we face the rough weather. Those who understand the truth are with us at all times.


|| 4 ||
Sabase Laghuta Hi Bhali
Laghuta Se Sab Hoye
Jasa Dwitiya Ka Chandrama
Shashi Lahai Sab Koye
It is always better to be humble. Being humble is an effective way of getting results. The Moon of the second day ( after the no moon day) is loved by all.


|| 5 ||
Chhama Badan Ko Uchit Hai
Chhotan Ko Utpat
Ka Bishno Ka Ghati Gaya
Jo Bhrug Mari Laat
Forgiveness befits the person who is great. One who is petty does something destructive. What is the loss incured by God Vishnu after receiving a blow from Maharishi Bhrugu.


|| 6 ||
Jaisa Bhojan Kijiye
Vaisa Hi Mana Hoye
Jaisa Paani Pijiye
Taisi Vani Hoye
Your mind is affected by the food that you consume. Your voice is the reflection of the drinks you have.


|| 7 ||
Kabira Te Nar Andh Hai
Jo Guru Kahate Aur
Hari Ruthe Guru Thor Hai
Guru Ruthe Nahi Thor
Kabir says that the people who do not understand Guru are blind. If God is displeased with us then Guru is there for salvation. If he is displeased there can be no salvation.


|| 8 ||
Kabira Dheeraj Ke Dhare
Haathi Man Bhar Khaaye
Tuk Tuk Bekar Me
Svan Ghare Ghar Jaaye
As the elephant has patience it eats till its mind is satisfied. But the impatient dog runs here and there in the hope of food.


|| 9 ||
Ghee Ke To Darshan Bhale
Khana Bhala Na Tel
Dana To Dushman Bhala
Murakh Ka Kya Mel
It is better if one can just have a chance of looking at the purified butter. It is not good to eat oil. It is good to have a sensible person as our enemy than to befriend a fool.


|| 10 ||
Chandan Jaisa Sadhu Hai
Sarp Hi Sab Sansar
Taake Ang Lapta Rahe
Mana Me Nahi Vikar
A good person is like a sandal tree. The world is like a snake. The snake resides on the sandal tree but the sandal tree does not become poisonous to any extent.


|| 11 ||
Vruksha Bola Paat Se
Sun Patte Meri Baat
Is Ghar Ki Yah Reet Hai
Ik Aawat Ik Jaat
A tree tells a leave that listen to the tradition of my family. It is that one comes while another goes.


|| 12 ||
Mai Meri Jab Jayegi
Tab Aayegi Aur
Jab Ye Nishchal Hoyega
Tab Pavega Thor
When ego will go then someone else will come. When the mind becomes calm then the truth is revealed.


|| 13 ||
Dhan Rahe Na Jauvan Rahe
Rahe Gaav Na Dhaam
Kahe Kabira Jas Rahe
Kar De Kisika Kaam
Niether the wealth has permanance nor the youth. What someone can have forever is his good name. This someone can achieve only after working for the wellbeing of others.


|| 14 ||
Jhute Sukha Ko Sukha Kahe
Manat Hai Mana Mouj
Jagat Chabena Kaal Ka
Kuch Mukh Me Kuch Goud
Our mind is delighted in having sensual pleasures. Let us understand that the world is being devoured by the time. Somebody is in the mouth while others are on the platter.


|| 15 ||
Maan Badai Naa Kare
Bada Na Bole Bol
Hira Mukha Se Na Kahe
Laakh Hamara Mol
Dont have ego. Dont talk big. A diamond never says that it has a great cost.


|| 16 ||
Gyani Se Kahiye Kaha
Kahat Kabir Lajaye
Andhe Aage Nachate
Kala Akarat Jaaye
When Kabir is asked to teach an intellectual then he feels shy. What is the use of showing dancing skills to one who is blind.


|| 17 ||
Sheetal Shabad Uchchariye
Aham Maniye Nahi
Tera Pritam Tujh Me Hai
Dushman Bhi Tujh Mahi
You should speak sweet honeyed words. You should not have ego. Your beloved is in your mind and your enemy is also there.


|| 18 ||
Khod Khad Dharati Sahe
Kaat Koot Vanaraay
Kutil Vachan Sadhu Sahe
Aur Se Saha Na Jaaye
The earth bears the digging. The forest bears the axe. A person who is good bears the harsh words. Others cannot bear the harsh words.


|| 19 ||
Mana Ke Bahu Satrang Hai
Chhin Chhin Badale Soye
Ek Rang Me Jo Rahe
Aisa Birla Koye
There are many colors of the mind. The mind is always changing its color. He is very rare whose mind does not change color.


|| 20 ||
Mitha Sab Koi Khaat Hai
Vish Hai Laage Dhaay
Neem Na Koi Peevasi
Sabe Rog Mit Jaay
Everyone likes eating sugar. This results in spreading of poison in the body. None likes to drink juice of Neem leaves. This can cure the body from all diseases.


|| 21 ||
Naari Purush Sab Hi Suno
Yah Satguru Ki Saakh
Vish Phal Phale Anek Hai
Mat Dekho Koi Chaakh
Listen everybody to the preaching of a good preacher. There are many ways of sensual enjoyment. But one should abstain from any such way.


|| 22 ||
Parnari Ki Yaachna
Jo Lahasun Ki Khan
Kone Baithe Khaiye
Pragat Hoye Nidaan
A desire for other’s wife is like a mine of garlic. A person can eat garlic hiding from all. But the fact of his having consumed garlic is clear to anyone who meets him.


|| 23 ||
Padha Suna Seekha Sabhi
Miti Naa Sanshay Shool
Kahe Kabir Kaso Kahu
Ye Sab Dukh Ka Mool
One may read, listen and learn everything. But after doing all this he has confusion. Kabir is at pains to explain that confusion is the root of sorrow.


|| 24 ||
Pahale Shabad Pichhaniye
Pichhe Kije Mol
Parkhi Parkhe Ratan Ko
Shabad Ka Mol Na Tol
First you should understand what has been said by others. Then you can make the valuation of the words that you have listened. A goldsmith can test the purity of gold. One does not have any means for the valuation and weighment of words.


|| 25 ||
Mana Unmana Na Toliye
Shabada Ke Mol Na Tol
Murakh Log Na Janaasi
Aapa Khoya Bol
When your mind is raged then you should not react to the words. One does not have any means for the valuation and weighment of words. The fools do not understand this and lose their balance while talking.


|| 26 ||
Shram Hi Se Sab Kuchh Bane
Bin Shram Mile Na Kaahi
Sidhi Ungli Ghee Jamo
Kabasu Nikase Naahi
Efforts can accomplish everything. Nothing can be accomplished without taking efforts. A purified butter that is frozen cannot be taken out with a straight finger.


|| 27 ||
Tinka Kabahu Naa Nindiye
Paav Tale Jo Hoye
Kaba Huni Aankho Pare
Peed Ghaneri Hoye
One should not abuse a blade of grass under one’s feet. If that happens to strike on one’s eye then there will be terrific pain.


|| 28 ||
Oonche Kul Ke Karane
Bhool Raha Sansar
Tab Kul Ki Kya Laaj Hai
Jab Tan Laago Chaad
Dont disregard the world at large under the notion that you belong to a great family. Where will be the prestige of your family on the day on which you will have to depart from the world.


|| 29 ||
Maya Maya Sab Kahe
Maya Lakhe Na Koye
Jo Manase Na Utare
Maya Kahiye Soye
Everyone talks about delusion. No one understands what it is. The one that wraps the mind should be identified as delusion.


|| 30 ||
Bhookhe Ko Kuch Deejiye
Yathashakti Jo Hoye
Taa Upar Sheetal Bachan
Lakho Aatma Soye
Offer to the needy whatever you can. Speak sweet honeyed words to all. This is how you will come to know the eternal spirit.


|| 31 ||
Chidiya Choch Bhar Le Gayi
Nadi Ko Ghatyo Naa Neer
Daan Diye Dhan Naa Ghaate
Kaha Gaye Daas Kabir
A sparrow flies away with a beakful of water. A river does not have any depletion of its water due to this. Similarly one does not decrease his wealth by giving donation.


|| 32 ||
Jo Koi Ninde Sadhu Ko
Sankat Aave Soye
Narak Jaaye Janame Mare
Mukti Kabahu Na Hoye
One who abuses a good person invites disaster for himself. He goes to hell and changes his state of mind every time. He cannot attain salvation in any manner.


|| 33 ||
Vishaya Vasana Uljhikar
Jaanam Gavaya Baat
Ab Pachatava Kya Kare
Nij Karani Kar Yaad
You were entangled in the sensual pleasures. This is how you have wasted your life. You are repenting today. You should remind your past actions.


|| 34 ||
Dharma Kiye Dhan Na Ghaate
Nadi Ghate Naa Neer
Apni Aakhan Dekh Lo
Kaha Gaye Das Kabir
One does not decrease his wealth by giving donation. A river does not experience any depletion of its water. Kabirdas wants you to see this on your own.


|| 35 ||
Ati Hat Mat Kar Bavare
Hat Se Baat Ne Hoye
Jyon Jyon Bheeje Kamari
Tyon Tyon Bhaari Hoye
Dont just insist for something without sense. Just by your insisting the thing cannot happen. The gunny bags of salt will gain weight every moment if these are immmersed in water.


|| 36 ||
Gyan Samagam Prem Sukh
Daya Bhakti Biswas
Guru Seva Te Paiye
Satguru Charan Niwas
Knowledge, association with good, love, happiness, mercy, devotion and faith. All this after being in the service at the feet of a good preceptor.


|| 37 ||
Guru Kumbhar Shish Kumbh Hai
Gadi Gadi Kadhe Khot
Andar Haat Savar De
Bahar Mare Chot
A preceptor is like a potter (earthman) and a disciple is like a pot. A potter hits the pot from outside and provides every support from within.


|| 38 ||
Kabira Man Panchi Bhaya
Bhave Taha Aa Jaaye
Jo Jaisi Sangat Kare
So Taisa Phal Paye
A mind is like a bird. It goes where it likes. The results one gets is for the company he keeps.


|| 39 ||
Sheel Shama Jab Upaje
Alakh Drishti Tab Hoye
Bin Sheel Pahuche Nahi
Laakh Kathe Jo Koye
When one experiences great qualities like good character and mercy rising in his mind then one can see the truth. Without this there is no other path to the truth.


|| 40 ||
Kabira Gyan Bichar Bin
Hari Dhundhan Ko Jaye
Tan Me Tirloki Base
Ab Tak Parkha Naye
Kabir says that you are searching God without proper thinking and knowledge. He is there within you. You dont know how to see.


|| 41 ||
Kala Nala Heen Jal
So Phir Paani Hoye
Jo Paani Moti Bhaya
So Phir Neer Na Hoye
An ice becomes water in the course of time. The water that has become a pearl will never again become water.


|| 42 ||
Kaami Tare Krodhi Tare
Lobhi Ki Gati Hoye
Salil Bhakta Sansar Me
Tarat Na Dekha Koye
A man of lust or a man of anger can get salvation. A man of greed can come to the right path. But a person who drinks wine is never seen as being saved in this world.


|| 43 ||
Tan Man Lajja Na Kare
Kaam Baan Ur Shaal
Ek Kaam Sab Bas Kiye
Sur Nar Muni Behaal
He who has arrows of lust pricked in his chest does not know how to tame his body or mind. The one lust has occupied the mind of all. The divine creatures, human beings and the people undertaking penance have been made to lose the peace by the lust.


|| 44 ||
Ghar Jaaye Ghar Ubhare
Ghar Raakhe Ghar Jaaye
Ek Achambha Dekhiya
Mua Kaal To Khaye
The utmost wonder is that the time devours everything.


|| 45 ||
Kabira Yah Gati Atpati
Chatpati Lakhi Naa Jaaye
Jo Mana Ki Khatpat Mite
Adhar Bhaya Thaharaye
A restless mind is not a mind in good state. Only the mind that becomes stable can get rest.


|| 46 ||
Sevak Seva Me Rahe
Sevak Kahiye Soye
Kahe Kabira Bavla
Sevak Kabhi Na Hoye
A good disciple remains in the service of preceptor. A person who is senseless can never be a good disciple.


|| 47 ||
Satguru Mila Jo Janiye
Gyan Ujala Hoye
Bharam Ka Bhanda Todkar
Rahe Nirala Hoye
If you will be at the feet of the preceptor then you will experience the glow of knowledge. You should break the sphere of delusion and maintain your independence.


|| 48 ||
Bandhe Ko Bandhe Mile
Chhoote Koun Upaaye
Jo Mile Nirbandh Ko
Pal Me Le Chhudaye
A person who has his arms tied meets others whose arms are also tied. Now how should they set themselves free. If they meet the one whose arms are not tied then he will set them free immediately.


|| 49 ||
Kabir Lahare Samudra Ki
Moti Bikhare Aaye
Bagula Parakh Na Jaan Hi
Hansa Chun Chun Khaye
The waves of sea spread the pearls on the sea-shore. A heron cannot understand how to identify a pearl. A swan carefully identifies the pearls and gets satisfied.


|| 50 ||
Kabira Darshan Sadhu Ke
Karan Na Kije Kaani
Jo Udham Se Lakshami Ki
Alas Mana Se Haani
Dont shirk to meet a good person. An intoxicated or lethargic mind causes loss of wealth.


|| 51 ||
Sadhu Shabda Samudra Hai
Jaa Me Ratan Bharaay
Mand Bhag Mutthi Bhar
Kankar Haath Lagaay
A good person is an ocean of pearls. Those who are not intelligent end with handful of sand after meeting a good person.


|| 52 ||
Sadhu Bhookha Bhav Ka
Dhan Ka Bhookha Nahi
Dhan Ka Bhookha Jo Phire
So To Sadhu Naahi
A good person wants that you should have faith in what he says. He is not after your money. He who roams for money is not a good person.


|| 53 ||
Bhes Dekh Na Puchhiye
Puchh Lijiye Gyan
Bina Kasouti Hot Nahi
Kanchan Ki Pehchan
Dont go after the outward appearance. See whether he has the right knowledge. A goldsmith cannot verify the purity of gold without putting it to test.


|| 54 ||
Kasturi Kundal Base
Mrug Dhoondhe Ban Maahi
Jyo Ghat Ghat Ram Hai
Duniya Dekhe Nahi
A deer has the fragrance in itself and runs throughout the forest for finding it. Similarly Ram is everywhere but the world does not see.


|| 55 ||
Koyala Bhi Ho Ujala
Jari Pari Jo Sek
Murakh Hoy Naa Ujala
Jo Kaala Ka Khet
A coal becomes white when put on fire. A fool does not shun his foolishness after any treatment.


|| 56 ||
Kabira Teri Jhopadi
Gal Katiyan Ke Paas
Jaisi Karani Vaisi Bharani
Tu Kyu Hua Udaas
One reaps what one sows


|| 57 ||
Karata Raha So Kyo Raha
Ab Kari Kyo Pachhataye
Boye Ped Babul Ka
So Amua Kaha Se Paaye
You were about to do this. But why you did not do. You had sown seeds of babul tree. Therefore you should not expect mangos from the tree.


|| 58 ||
Kabira Garva Naa Kijiye
Kabahu Naa Hasiye Koye
Aja Ye Naav Samudra Me
Naa Jane Kya Hoye
Dont feel proud. Dont mock at anybody. Your life is like a boat in the sea. Who can say what may happen at any time.


|| 59 ||
Maati kahe kumbhar ko
Tu kya roondhe mohe
Ek din aisaa aayega
Mai roondhoo gi tohe.
A person who makes earthen pots from the earth beats the earth under his feet to facilitate fine moulding work. See how the destiny works. His body is decomposed in the same earth after his death.


|| 60 ||
Aaye hai jo jaayenge
Raaja rank fakir
Ek sinhaansan chadhi chale
Dooja bandhe janjeer.
He who comes to this world has to depart. He may be a king or a fakir. He who departs also comes back due to his effects of past actions.


|| 61 ||
Chalti chakki dekh re
Diya kabira roye
Do paatan ke beech mein
Baaki bacha na koyi
Baaki bacha na koyi.
Between the grinding stones of cravings and aversions the whole world is being crushed. Kabir weeps at the plight of the world as none is able to see the truth.


|| 62 ||
Kabira Seep Samudra Ki
Khara Jal Nahi Le
Paani Piye Swati Ka
Shobha Sagar De
A shell in the ocean does not take any salty water from the ocean. It drinks the raindrops falling during the period of Swati Constellation and adds to the beauty of the ocean.


|| 63 ||
Satguru Mila To Sab Mile
Naa To Mila Naa Koye
Maat Pita Sut Bandhava
Ye To Ghar Ghar Hoye
If someone is able to have a privilege of being in the company of a good preceptor then he has the privilege of being in the company of all. Otherwise he does not understand any relation. The relatives like mother, father, son and brother are there in all families.


|| 64 ||
Chinta To Guru Naam Ki
Aur Na Chitave Daas
Jo Koi Chitave Naam Binu
Soi Kaal Ki Aas
It is better to meditate on Guru. He who meditates on anything else will be devoured by the time.


|| 65 ||
Kahata Hu Kahi Jaat Hu
Kahat Bajaye Dhol
Swasa Khaali Jaat Hai
Teen Lok Ka Mol
Dont say that you belong to a very prominent caste. This is nothing for which you should beat drums. You are wasting your breaths and standing separated from the eternal spirit.


|| 66 ||
Daas Bananna Kathin Hai
Mai Dasan Ka Daas
Ab To Aisa Hoye Rahu
Paav Tale Ki Ghaas
It is difficult to serve others. I am serving those who are serving others. Now I long to become like a grass under the feet of people.


|| 67 ||
Vishaya Tyag Bairagya Hai
Samata Kahiye Gyan
Sukhadayi Sab Jeev So
Yahi Bhakati Parmaan
Being detached means renouncing the sensual pleasures. Knowledge means equanimity. Devotion means creating happiness for all the beings.


|| 68 ||
Bhakati Mahal Bahu Ooch Hai
Door Hi Se Darshaay
Jo Koi Jan Bhakati Kare
Shobha Barni Naa Jaaye
The palace of devotion has a very great height. This one can observe from a distance. Whoever is engaged in devotion, words fall short for describing his beauty.


|| 69 ||
Kabira Yeh Sansar Hai
Jaisa Semal Phool
Din Das Ke Vyavahar Me
Jhoote Rang Na Bhool
This world is like a flower that traps a bee. Dont get overwhelmed by what you experience for a while.


|| 70 ||
Ek Din Aisa Aayega
Sab Se Pade Bichhoh
Raja Rani Raav Rank
Savadh Kyo Nahi Hoye
On the last day there will be separation from everybody. This should be understood by one and all.


|| 71 ||
Jaise Bhakati Kare Sabai
Vaise Pooja Hoye
Bhay Palat Hai Jeev Ko
Nirbhay Hoye Naa Koye
Your mind should have devotion to come out of the loop of fear.


|| 72 ||
Shabda Barabar Dhan Nahi
Jo Koi Jaane Bol
Hira To Damo Mile
Shabda Mol Naa Tol
He who is good at speaking understands that there is no wealth like words. A diamond can be purchased for a value. One do not just have any means for valuation of word.


|| 73 ||
Ram Naam Ki Loot Hai
Loot Sake To Loot
Antakaal Pachhatayega
Jab Pran Jayenge Chhoot
You have the access to the name of Ram without any cost. Why dont you have access to it as much as you can. Otherwise at the last moment of your life you will feel sorry.


|| 74 ||
Neend Nishani Mout Ki
Uttha Kabira Jaag
Aur Rasayan Chaadi Ke
Naam Rasayan Laag
A state of being asleep is at par with the state of being dead. Therefore Kabir should get up. He should shun everything else and remember the God.


|| 75 ||
Jaha Kshama Taha Dharma Hai
Jaha Lobh Taha Paap
Jaha Krodh Taha Kaal Hai
Jaha Shaanti Taha Aap
Righteousness is there where forgiveness is. Sin is there where greed is. Death is there where anger is. God is there where peace is.


|| 76 ||
Paachhe Din Paachhe Gaye
Hari Se Kiyo Na Het
Ab Pachhtaye Hot Kya
Jab Chidiya Chug Gayi Khet
You have spent so many days in the past without remembering God. Now you are feeling sad. What can be done now? The field has been rendered without any grain by the sparrows now.


|| 77 ||
Saach Barabar Tap Nahi
Jhoot Barabar Paap
Jaake Hirday Saach Hai
Taake Hirday Aap
There is no penance greater than abiding by the truth. There is no sin greater than being false. Those who have truth in their mind have God in their mind.